निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के इलाज में मनमानी रुकने का नाम नहीं ले रही है। निजी अस्पताल कोरोना मरीजों के इलाज के लिए अभी भी मनमाना वसूली ले रहे हैं। आलम यह है कि महमूरगंज स्थित एक अस्पताल में भर्ती एक मरीज के इलाज का नौ दिन का छह लाख का बिल थमाया गया तो परिजन हैरान हो गए।
इलाज, जांच में मनमानी की शिकायत लगातार सामने आ रही है। जबकि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की ओर से केवल कागजी कार्रवाई की जा रही है। ठोस कार्रवाई न होने की वजह से ही मनमानी पर अंकुश नही लग पा रहा है। शासन के आदेश के बाद भी मरीजों से अलग अलग मद में रुपये लिए जा रहे हैं। महमूरगंज स्थित एक कोविड अस्पताल में हाल ही में भर्ती 64 वर्षीय कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज का 9 दिन का 6 लाख का बिल मिला। इसमें डॉक्टर के राउंड लेने, जांच, पीपीई किट आदि के दाम भी जोड़े गए थे। जबकि शासन के आदेश के तहत ली जाने वाली फीस में पीपीई किट, राउंड आदि का खर्च शामिल है।
मरीज के परिजन के मुताबिक 90000 का खर्च मिसलिनीयस में दर्शाया गया है। बताया कि बार-बार शासनादेश का भी हवाला दिया गया लेकिन कहीं भी कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ। इधर, भिखारीपुर स्थित एक निजी अस्पताल में भी इलाज करा रहे कोरोना एक संक्रमित मरीज के परिजन से इलाज, भोजन आदि का एडवांस 30 से 50 हजार जमा कराया जा रहा है। इसकी शिकायत भी पहुंच रही है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
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कोरोना जांच पर भी अंकुश नही
शासन के आदेश के अनुसार कोरोना जांच का भी रेट निर्धारित है लेकिन अब भी निजी अस्पतालों के लैब में उससे अधिक दाम लिए जा रहे हैं। आरटीपीसीआर के 700 से 900 की जगह कोई 1200 तो कोई 1500 ले रहा है। बार बार जिला प्रशासन की ओर से आदेश जारी होने के बाद भी कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है।
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लापरवाही की जांच अधूरी, कैसे होगी कार्रवाई
मैदागिन स्थित मेडविन हॉस्पिटल में पद्म विभूषण पंडित छन्नू लाल मिश्र की बेटी संगीता मिश्र की मौत के बाद इलाज में लापरवाही के आरोप की जांच भी अधूरी है। छन्नूलाल मिश्र की छोटी बेटी डॉ. नम्रता मिश्रा ने मेडविन हॉस्पिटल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। मामला हाईप्रोफाइल होने की वजह से पीएमओ ने भी इसका संज्ञान लिया। पिछले सप्ताह मंगलवार को ही जिलाधिकारी ने आनन-फानन में मामले की जांच करा कर 3 दिन में रिपोर्ट मांगी थी। मंडलीय अस्पताल में पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड का गठन भी हुआ लेकिन सप्ताह भर होने के बाद भी जांच रिपोर्ट अधूरी है। ऐसे में कब तक रिपोर्ट सौंपी जाएगी, क्या कार्रवाई होगी, यह चर्चा का विषय बना है।
कोट...
अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगाने के उद्देश्य से ही इलाज का खर्च सार्वजनिक करने को कहा गया है। इसका उल्लंघन करने वालो के खिलाफ महामारी एक्ट में कार्रवाई भी होगी।-कौशल राज शर्मा,जिलाधिकारी