संयुक्त सचिव ने उपमहानिदेशक, विदेश व्यापार अमित कुमार के हवाले से बताया कि परिक्षेत्र से वर्ष 2018-19 में 1503 करोड़ के हैंडनाटेड कालीनों का निर्यात हुआ था जो अगले वर्ष (वित्त वर्ष 2019 - 20) में घट कर 1211 करोड़ का हो गया था।
इसी बीच कोरोना का कहर भी पड़ गया और 31 दिसंबर को वाणिज्य मंत्रालय द्वारा हैंडनाटेड कालीनों का एचएसएन कोड बदल दिए जाने से लोगों को मिल रही पांच प्रतिशत इंसेंटिव भी बंद हो गई थी। इसका दूरगामी परिणाम उद्योग पर पड़ा।
बरनवाल ने बताया कि समस्या बढ़ते देख एकमा ने फियो के सहयोग से वाणिज्य मंत्रालय से इंसेंटिव व्यवस्था पुन: बहाल करने के लगातार मांग करती रही। अंतत: सरकार ने समस्या को समझा और इंसेंटिव योजना को बहाल कर दिया।
उन्होंने अनुमानत: बताया कि इससे 500 से अधिक कालीन निर्यातकों को 70 से 75 करोड़ रुपये का लटका भुगतान मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। एकमाध्यक्ष ओएन मिश्र ने इसके लिए उपमहानिदेशक, विदेश व्यापार अमित कुमार के प्रति का आभार जताया।