भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के चेयरमैन राघव चंद्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की 3000 किमी लंबी सड़कों को फोरलेन बनाया जाएगा। इस पर 40 हजार करोड़ से अधिक रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें पूर्वांचल की 800 किमी लंबी सड़कें हैं, जिन पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। बुधवार को फोरलेन सड़कों की समीक्षा के बाद चंद्रा ने पत्रकारों को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में ज्यादातर सड़कों पर काम शुरू हो चुका है। इनमें से कुछ सड़कों को वर्ष 2018 और बाकी मार्गों को वर्ष 2019 तक पूरा करने का लक्ष्य है। बनारस से लखनऊ वाया सुल्तानपुर, बनारस से गोरखपुर वाया गाजीपुर नेपाल बार्डर तक, बनारस से वाया टांडा (अंबेडकर नगर) आजमगढ़ होते हुए नेपाल बार्डर तक, बनारस से हनुमना (मध्य प्रदेश) वाया सोनभद्र तक सड़क को फोर लेन बनाने का काम शुरू हो गया है। वाराणसी से औरंगाबाद (बिहार) तक की सड़क को छह लेन बनाने का काम वर्ष 2017 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए केंद्र ने 4000 करोड़ रुपये जारी भी कर दिए हैं।
उन्होंने बताया कि वाराणसी-सुल्तानपुर फोरलेन (137 किमी, लागत 1766 करोड़) और वाराणसी-आजमगढ़ फोर लेन (178 किमी, लागत-2200 करोड़) का काम जून 2018 तक पूरा हो जाएगा। वाराणसी-गोरखपुर फोर लेन (260 किमी, लागत-3000 करोड़) बनेगा। इसमें वाराणसी से गाजीपुर के बीच 76 किमी पर 900 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बताया कि वाराणसी-औरंगाबाद (बिहार) तक सिक्स लेन (193 किमी, लागत 2850 करोड़) का 60 किमी तक काम पूरा हो चुका है। अप्रैल 2017 तक काम पूरा हो जाएगा।
एनएचएआई अब राजमार्गों के सभी टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रानिक टोलिंग लगाएगा। इसकी शुरूआत कर दी गई है। इसके लिए वाहन स्वामियों को कार्ड दिया जाएगा। साथ ही रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन टैग (आरएफआईडी टैग) का लेवल वाहन पर लगा होगा, जिस कारण टोल टैक्स पर उनके वाहनों को रोका नहीं जाएगा। उन्हें आईसीआईसीआई बैंक से कार्ड और चिप मुहैया कराई जाएगी उसे से टैक्स का पैसा उनके खाते से काट लिया जाएगा।