बाइबिल कुल मिलाकर 66 ग्रंथों का संकलन है। पूर्व विधान में 39 तथा नव विधान में 27 ग्रंथ हैं। बाइबिल ईसाई धर्म (मसीही) पंथ की आधारशिला तथा ईसाइयों (मसीहियों) का पवित्रतम धर्मग्रंथ है। इसके दो भाग हैं पूर्वविधान और नवविधान। बाइबिल का पूर्वार्ध यहूदियों का भी धर्मग्रंथ है तथा उत्तरार्द्ध ईसा मसीह एवं उनकी शिक्षाओं पर आधारित है। पूर्वविधान में प्राचीन यहूदी धर्म और यहूदी लोगों की गाथाएं, पौराणिक कहानियां (खास तौर पर सृष्टि) आदि का वर्णन है। इसकी मूलभाषा इब्रानी और अरामी थी।
ईसा के शिष्यों ने लिखा था नवविधान
नवविधान ईसा मसीह के बाद की है, जिसे ईसा के शिष्यों ने लिखा था। इसमें ईसा (यीशु) की जीवनी, उपदेश और शिष्यों के कार्य लिखे गए हैं। इसकी मूलभाषा कुछ अरामी और अधिकतर बोलचाल की प्राचीन ग्रीक थी। इसमें खास तौर पर चार शुभसंदेश (सुसमाचार) हैं जो ईसा की जीवनी का उनके चार शिष्यों के नाम से किसी और के द्वारा वर्णन है मत्ती, लूका, युहन्ना और मरकुस।
शताब्दियों से बाइबिल के अनुवाद का कार्य चला आ रहा है। इस्रायली लोग इब्रानी बाइबिल का छायानुवाद अरामेयिक बोलचाल में किया करते थे। सिकंदरिया के यहूदियों ने दूसरी शताब्दी ईपू में इब्रानी बाइबिल का यूनानी अनुवाद किया था जो सेप्टुआर्जिट (सप्तति) के नाम से विख्यात है। लगभग सन 400 ई. में संत जेरोम ने समस्त बाइबिल की लैटिन अनुवाद प्रस्तुत किया था और यह शताब्दियों तक बाइबिल का सर्वाधिक प्रचलित रूप रहा है। आधुनिक काल में इब्रानी तथा यूनानी मूल के आधार पर सहस्त्र से भी अधिक भाषाओं में बाइबिल का अनुवाद हुआ है। पूर्वविधान का सर्वोत्तम प्रामाणिक इब्रानी पाठ किट्टल (सन् 1937 ई.) तथा यूनानी पाठ राल्फस (1914 ई.) ने किया।