वाराणसी। आईआईटी बीएचयू के नौवें दीक्षांत समारोह में सोमवार को विभिन्न विभागों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले 52 मेधावियों को स्वर्ण पदक दिया गया। इस दौरान पीएचडी की 153 समेत स्नातक, स्नातकोत्तर में 1481 उपाधियां दी गईं। बतौर मुख्य अतिथि ने समारोह में आनलाइन संबोधन में संस्थान के पूर्व छात्र और यूएस में कंपनी के सीईओ जय चौधरी ने मेधावियों को बधाई देते हुए कहा कि जीवन में चुनौतियां तो बहुत हैं, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। लक्ष्य हासिल करने के लिए चुनौतियों का डटकर सामना करते रहने से सफलता कदम जरूर चूमेगी।
बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में आयोजित समारोह में ऑफलाइन तो कम ही छात्र शामिल हुए, बड़ी संख्या में लोगों ने ऑनलाइन शिरकत की। इस दौरान देश-विदेश में रहने वाले पुरातन छात्रों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। मुख्य अतिथि 1980 बैच के इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग के छात्र जय चौधरी ने संस्थान में अपने छात्र जीवन की यादों को छात्रों से साझा किया। मेधावियों से कहा कि बदलते समय के साथ ही अब जीवन में आगे बढ़ने की राह कठिन तो है, लेकिन किसी भी तरह से नामुमकिन नहीं है। जिस तरह से नई-नई तकनीक आ रही हैं, उससे काम करने में और आसानी होगी। खुद के व्यवसाय का अनुभव बताते हुए कहा कि साइबर सिक्योरिटी आदि बहुत से ऐसे मुद्दे हैं, जिसको लेकर अधिक सजग रहने की जरूरत है। संस्थान के बोर्ड ऑफ गवनर्स के चेयरमैन पद्मश्री कोटा हरिनारायन ने भी पदक, उपाधि पाने वालों को बधाई देते हुए कहा कि सफलता के इस कदम के बाद जिम्मेदारियां और बढ़ जाती हैं। जीवन में निर्धारित लक्ष्य पाने के लिए इस तरह की सफलताओं से आत्मविश्वास बढ़ेगा। अतिथियों का स्वागत करते हुए निदेशक प्रो. प्रमोद जैन ने संस्थान की उपलब्धियों, हाल ही में इसरो, रक्षा मंत्रालय, सड़क परिवहन मंत्रालय आदि से शोध, नए कोर्स आदि को लेकर हुए करार के बारे में बताया। संचालन कार्यवाहक कुलसचिव राजन श्रीवास्तव ने किया। इस दौरान प्रो. श्याम बिहारी द्विवेदी, प्रो. राजीव प्रकाश आदि मौजूद रहे।
अंकन बोहरा को राष्ट्रपति पदक, अनन्या को मिला निदेशक पदक
दीक्षांत समारोह में कंप्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के छात्र अंकन बोहरा को राष्ट्रपति पदक मिला। इसके अलावा संस्थान में शिक्षा सहित अन्य क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन करने वाली इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की छात्रा अनन्या गुप्ता को निदेशक पदक से नवाजा गया। अंकन बोहरा को इन उत्कृष्ट पदक के साथ ही कुल सात स्वर्ण, एक रजत पदक, डॉ.एनी बेसेंट पुरस्कार और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग की छात्रा अनन्या गुप्ता को निदेशक पदक के साथ ही श्रीमती इंदिरा त्रिपाठी स्वर्ण पदक दिया गया।
समारोह में मिली ये उपाधियां
शोध 153
एमटेक/एमफार्मा 294
इंट्रीग्रेटेड ड्यूल और मास्टर डिग्री 259
बीटेक 775
कोई बनना चाहता आईएएस, शिक्षक बनना किसी का सपना
समारोह में स्वर्ण पदक पाने वाले मेधावियों में कोई आगे चलकर आईएएस बनना चाहता है तो किसी का सपना शिक्षक बनने का है। इसके लिए सिविल सर्विसेज की तैयारी के साथ ही शोध करने में छात्र-छात्रा लगे हैं।
सिविल इंजीनियरिंग से एमटेक तो पूरा हो गया। आईआईटी खडगपुर से शोध कार्य कर रहा हूं। शिक्षा के क्षेत्र में ही आगे सेवा देने का सपना है।-सुरेंद्र बनिया, एमटेक सिविल इंजीनियरिंग
पहली बार पदक पाकर बहुत खुश हूं। अब शोध करने की तैयारी चल रही है, जिससे कि सपने को आसानी से साकार कर सकूं।-विनय यादव, मैकेनिकल इंजीनियरिंग
इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के साथ ही उसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक पाने का सपना भी आज पूरा हुआ। सम्मान से आत्मविश्वास बढ़ा है।-अवनीश सिंह, केमिकल इंजीनियरिंग
आगे आईएएस बनकर समाज सेवा करने का जो सपना देखा है, उसे पूरा करने के लिए सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू कर दी है। -अंकित कुमार, सिविल इंजीनियरिंग
इंजीनियरिंग करने के बाद प्रोफेसर बनकर शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना है। पदक मिलने के बाद आत्मविश्वास के साथ ही जिम्मेदारी भी बढ़ी है।-अमन श्रेष्ठ, इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग
खुद का व्यवसाय कर युवाओं को रोजगार के अवसर मुहैया कराने का ही सपना देखा है, अब उसी को पूरा करना है, पदक पाकर उत्साहित हूं।-प्रशांत बघेल, मैकेनिकल इंजीनियरिंग
आईएएस बनना चाहता हूं। इस मिशन की कामयाबी में संस्थान स्तर पर मिलने वाली यह उपलब्धि बहुत हौसला बढ़ाएगी। -शुभम महतो, माइनिंग इंजीनियरिंग
आईएएस बनना अंकन बोहरा का सपना
आईआईटी बीएचयू में राष्ट्रपति पदक पाने वाले कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के छात्र अंकन बोहरा का सपना आगे चलकर आईएएस बनने का है। मूल रूप से राजस्थान के चित्तौड़गढ़ निवासी अंकन फिलहाल बंगलूरू में एक कंपनी में रिसर्च इंजीनियर हैं। समारोह में राष्ट्रपति पदक के साथ ही सात स्वर्ण, एक रजत, पुरस्कार दिया गया। बताया कि कोरोना काल में भले ही संस्थान में कक्षाएं नहीं चल रही थी लेकिन घर से ही आनलाइन पढ़ाई जारी रही।
अनन्या बोली-जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि
इंजीनियरिंग में दाखिला लेने के बाद से ही नियमित पढ़ाई के साथ ही संस्थान स्तर पर सामाजिक, सांस्कृतिक सहित अन्य गतिविधियों में भी भागीदारी करने का अवसर मिला। मूल रुप से झांसी निवासी अनन्या गुप्ता का कहना है कि दीक्षांत समारोह में निदेशक पदक पाना जीवन की बड़ी उपलब्धि है। इससे मेरे साथ-साथ परिवार के लोग भी बहुत खुश हैं। पदक पुरस्कार ने निश्चित ही जिम्मेदारियां बढ़ा दी है। फिलहाल इंजीनियर बनकर ही देश सेवा करना चाहते हैं।
11 महीने बाद स्वतंत्रता भवन में हुए आयोजन
कोरोना काल से ही बंद चल रहे स्वतंत्रता भवन में 11 महीने बाद कोई आयोजन हुआ। आईआईटी दीक्षांत समारोह के आयोजन में कोविड प्रोटोकॉल का भी पूरा ध्यान रखा गया था। यहां हर एक व्यक्ति के बाद बगल की सीट छोड़कर अगली सीट पर बैठने की व्यवस्था की गई थी। साथ ही गेट पर मॉस्क लगाकर ही अंदर जाने के लिए सुरक्षाकर्मी लोगों को कहते नजर आए। इसके अलावा सेनेटाइजेशन की भी व्यवस्था थी।
आईआईटी की वेबसाइट पर हुआ सजीव प्रसारण
कोरोना काल में बहुत से लोग समारोह में शामिल नहीं हो सके थे। यहां तक कि स्वर्ण पदक पाने वाले 52 में से भी केवल 32 छात्र ही आए थे, बाकी ने आनलाइन हिस्सा लिया। इधर दूर दराज बैठे छात्र, पूर्व छात्रों सहित अन्य लोग इस कार्यक्रम को देख सकें, इसके लिए आईआईटी बीएचयू की वेबसाइट पर कार्यक्रम का सजीव प्रसारण भी कराया गया। इसके अलावा मुख्य अतिथि, समारोह के अध्यक्ष भी आनलाइन ही कार्यक्रम में शामिल हुए।