सामान्य गेहूं में 25 से 30 पीपीएम जिंक और 30 से 35 पीपीएम आयरन होता है। भारत में आयरन और जिंक की कमी के कारण सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी बहुतायत है। गर्भवती महिलाओं और छह से 35 साल तक की उम्र के लोगों में आयरन की कमी पाई जाती है। आयरन की कमी के कारण महिलाओं में गर्भधारण करने में परेशानी, गर्भधारण के दौरान बच्चे की मृत्यु होने के मामले सामने आते हैं। वहीं, जिंक की कमी के कारण बच्चों की शारीरिक वृद्धि रुकने के साथ कई बीमारियां होती हैं।
बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान के प्रो. रमेश सिंह ने बताया कि पर्याप्त मात्रा वाले जिंक और आयरन युक्त गेहूं का शोध दो संस्थानों द्वारा मिलकर किए जाने के कारण अभी फिलहाल इसे कोई नाम नहीं दिया गया है। हालांकि बीएचयू की ओर से इसे अभी बीएचयू डब्ल्यू-11 नाम से ही जाना जाता है। यह नाम अभी आधिकारिक नहीं है। केंद्र और राज्य सरकार से मंजूरी मिलने के बाद ही इसे कोई आधिकारिक नाम दिया जाएगा।