बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर को कार्यभार संभाले हुए छह सप्ताह हो चुके हैं। इस दौरान परिसर में कई हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। अराजकता पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। वह मानते हैं कि बीएचयू और जेएनयू के माहौल में बड़ा अंतर है। जेएनयू के छात्र अपनी समस्याओं के समाधान के लिए फोर डी (डिबेट, डिस्कशन, डिसएग्रीमेंट, डिसेंट) का रास्ता अपनाते हैं।
जेएनयू के छात्र मारपीट नहीं करते हैं। बीएचयू के छात्रों को भी कानून के दायरे में रहते हुए फोर डी को अपनाना होगा। समझना होगा कि आपस में मारपीट, पत्थरबाजी और आगजनी से समस्या का हल नहीं होगा।
इसके लिए प्रो. भटनागर ने छात्रावासों में जाकर छात्र-छात्राओं से बातचीत करने का फैसला किया है। उनकी योजना पठन-पाठन का माहौल बनाने के लिए देश-विदेश के उत्कृष्ट शिक्षकों को तलाश कर बीएचयू में लाने की भी है।
हॉस्टल का दौरा कर छात्रों से करेंगे बातचीत
परिसर के माहौल को पढ़ाई के अनुकूल बनाने के लिए सबसे पहले संवादहीनता खत्म की जाएगी। छात्रावासों में जाकर छात्र-छात्राओं से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनेंगे। शुरुआत उन छात्रावासों से होगी, जहां सबसे अधिक समस्या हैं।
आठ मई की घटना के बाद बुधवार को डीन, डायरेक्टर, हॉस्टलों के वार्डन, अधिकारियों और छात्रों संग बैठक की है। छात्रों को समझाया गया कि एक बार आपराधिक रिकार्ड बनने पर प्राइवेट नौकरी पाना भी कठिन हो जाएगा। जरूरत पड़ने पर अभिभावकों को भी बुलाकर बातचीत करेंगे।
शोध को प्रोत्साहन और एकेडमिक स्टैंडर्ड पर रहेगा जोर
प्रो. भटनागर का कहना है कि एकेडमिक स्टैंडर्ड पर पूरा जोर रहेगा। इसके लिए उत्कृष्ट शिक्षकों को लाया जाएगा। महामना जी भी ऐसा ही करते थे। जब उत्कृष्ट शिक्षक आएंगे तभी उत्कृष्ट छात्र भी निकलेंगे और विश्वविद्यालय का एकेडमिक परफार्मेंस भी सुधर जाएगा।
इन शिक्षकों को कैंपस में रहने की सुविधा के लिए ट्रांजिट हॉस्टल का विस्तार किया जाएगा। एकेडमिक स्टैंडर्ड को बढ़ाना, रिसर्च, और इनोवेशन चुनौतियां हैं। थॉट प्रोसेस बढ़ाने के लिए हर संकाय में जाकर शिक्षकों-छात्रों से मिलकर बातचीत शुरू कर दी है।