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बीएचयू में धातुओं की भस्म से बन रही आयुर्वेदिक दवाइयां

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वाराणसी। बीएचयू आयुर्वेद संकाय के रसशास्त्र एवं भैषज्य कल्पना विभाग में इन दिनों धातुओं के भस्म से आयुर्वेदिक औषधियां बनाई जा रही हैं। इसके माध्यम से आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने की पहल की जा रही है। शुक्रवार को दो दिवसीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने धातुओं से बने भस्म के चिकित्सकीय उपयोग पर विस्तृत चर्चा की।
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केएन उडप्पा सभागार में आयोजित संगोष्ठी में आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. आरके जैन ने कहा कि वर्तमान में रसौषधियों को लेकर विश्वव्यापी चिंता की जा रही है। यह सत्य है कि केवल भारतीय मनीषियों को ही इस विधा का ज्ञान था और उन्होंने अनेक धातुओं का भस्म बनाकर कई प्रकार के असाध्य रोगों से मुक्त किया है। कर्नाटक के बेलारी से आए प्रो. गोपी कृष्णा ने आयुर्वेदिक सिद्धांतों के आधार पर कहा कि यदि समय रहते रोग की पहचान कर जल्द इलाज शुरू किया जाए तो कैंसर जैसे रोग से मुक्ति पाई जा सकती है। इस दौरान देश के विभिन्न जगहों से आए 150 प्रतिनिधियों ने कैंसर, पित्ताशय, डायबिटीज आदि बीमारियों में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों के उपयोग पर चर्चा की। आयुर्वेद संकाय प्रमुख प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी ने कहा कि शोध कार्य का मूल उद्धेश्य मानवता की सेवा है। अतिथियों का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद चौधरी ने संगोष्ठी के उद्देश्यों के बारे में बताया। इस दौरान प्रो. केके द्विवेदी, डा. अजय पांडेय, प्रो. संजय पांडेय, डॉ. वीणा, डॉ. सौम्या, डॉ. सुकृत आदि मौजूद रहे।
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