बीएचयू में इतिहास विभाग के शोधार्थी सूरज नाथ ने श्रीलंका में पांचवें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन इंटेंजिबल कल्चरल हेरिटेज में अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। परंपराओं और आधुनिकता के बीच कड़ी के साथ ही भारत के पुराने कानून को आधुनिक कानूनी न्यायशास्त्र के साथ एकीकृत करने पर अपना पक्ष रखा। स्वदेशी कानूनी परंपराओं को आधुनिक भारतीय विधिशास्त्र में समाहित करने की बात कही। इससे परंपरा और आधुनिकता के बीच एक ब्रिज का निर्माण होगा। महिला महाविद्यालय में इतिहास यूनिट की डॉ. अंजली यादव के मार्गदर्शन में शोध कर रहे हैं। श्रीलंका के श्री जयवर्धनेपुरा विश्वविद्यालय स्थित मानवशास्त्र विभाग और सार्क सांस्कृतिक केंद्र की ओर से संयुक्त रूप से ये कार्यक्रम किया जा रहा है, जिसमें विश्व भर से 550 से ज्यादा प्रतिभागियों ने शोधपत्र प्रस्तुत किया। इसकी थीम ब्रिजिंग पास्ट एंड फ्यूचर: द रोल ऑफ इंटैंजिबल हेरिटेज इन आ चेंजिंग वर्ल्ड की रही।