बीएचयू के वैज्ञानिक कोयले के बायोमिथेनाइजेशन पर अध्ययन में जुटे हैं। पता लगा रहे हैं कि धरती के भीतर कोयले की मौजूदगी के साथ ही उसे मीथेन में परिवर्तित करने के लिए जैविक विधि कितनी कारगर है।
कोयला मंत्रालय ने देश में ऊर्जा संकट को देखते हुए बीएचयू के वैज्ञानिकों का सहारा लिया है।बायोमिथेनाइजेशन पर काम की मंजूरी दी है।
बीएचयू के भूविज्ञान विभाग के प्रो. प्रकाश कुमार सिंह और वनस्पति विज्ञान की प्रो. आशा लता सिंह ने बताया कि अध्ययन के दो पहलु होंगे। पहला कोयले को जमीन के अंदर ही मीथेन में परिवर्तित कर ग्रीन एनर्जी प्राप्त करना है। दूसरा कोयला खनन रोकने से पर्यावरण को होने वाले दुष्परिणाम से बचाना है। इस तरह की परियोजना पर देश में पहली बार काम हो रहा है। कुलपति प्रो. सुधीर कुमार जैन ने दोनों वैज्ञानिकों को बधाई दी।
कोयले से बायोकेमिकल तकनीक पर भी हो रहा काम
प्रो. प्रकाश सिंह और प्रो. आशा लता सिंह की टीम डीएसटी के एक अन्य प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही है। इसमें पूर्वाेत्तर और कुछ अन्य स्थानों पर पाए जाने वाले सल्फर-युक्त कोयले से बायोकेमिकल तकनीक के माध्यम से सल्फर को कम किया जाना शामिल है। सल्फर से होने वाले पर्यावरणीय क्षति से बचने के पहलुओं पर भी अध्ययन किया जा रहा है।