बीएचयू के विज्ञान संस्थान का बजट मेडिकल साइंस से करीब पौने दोगुना ज्यादा हो गया है। विज्ञान को 9.80 करोड़ तो आईएमएस बीएचयू को 5.11 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। वहीं, इस साल की एकेडमिक्स में 1.35 करोड़ के बजट के साथ रसायन विज्ञान सबसे महंगा विभाग है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में महिला महाविद्यालय के बराबर का बजट हो चुका है। एमएमवी कि सभी 31 सेक्शन को 1.36 करोड़ मिलेंगे। उर्दू को 1 लाख का बजट मिला। भोजपुरी अध्ययन केंद्र और संग्रहालय विज्ञान को सबसे कम 50-50 हजार रुपये आवंटित किए जाने हैं। बीएचयू के विभागों के लिए 2026-27 का अनुमानित बजट 29 करोड़ चार लाख रुपये निर्धारित किया गया है।
सबसे बड़े संकाय के 22 विभागों को 1.18 करोड़
रसायन विज्ञान के बाद दूसरा सबसे महंगा विभाग जंतु विज्ञान को 1.14 करोड़, भौतिक विज्ञान विभाग को एक करोड़ रुपये मिलेंगे। संकायों में दूसरा स्थान 5.11 करोड़ रुपये के साथ मेडिकल साइंस का रहा। वेटनरी एंड एनिमल साइंस को 2.43 करोड़, कृषि विज्ञान संस्थान को 1.97 करोड़, बरकछा के दक्षिणी परिसर को 1.49 करोड़, कला संकाय के 22 विभागों को 1.18 करोड़, आयुर्वेद संकाय को 83.90 लाख, सामाजिक विज्ञान संकाय को 81.15 लाख, मैनेजमेंट फैकल्टी को 78.35 लाख, पर्यावरण संस्थान को 77.75 लाख, संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय को 52.30 लाख, दृश्य कला संकाय को 51.30 लाख, शिक्षा संकाय को 37.25 लाख, वाणिज्य संकाय को 30 लाख, विधि संकाय को 27.75 लाख, मंच कला संकाय को 26.90 लाख और डेंटल साइंस को 21.40 लाख रुपये दिए जाएंगे।
सेमिनार को 10-16 लाख, स्कॉलरशिप के 60 लाख
संकायों को 10-16 लाख रुपये सेमिनार, कार्यशालाओं और सम्मेलन के लिए दिए जाएंगे। स्कॉलरशिप और फेलोशिप की धनराशि अलग-अलग तय की गईं हैं। आईएमएस में 60 लाख रुपये की स्कॉलरशिप और फेलोशिप दी जाएगी। विज्ञान संस्थान में किसी तरह की स्कॉलरशिप के लिए कोई धन आवंटित नहीं किया गया है।
संस्कृत को 3.92 लाख और उर्दू को 1.05 लाख
भाषाओं में सबसे ज्यादा बजट संस्कृत का 3.92 लाख तय किया गया है। प्रेमचंद शोध संस्थान केंद्र को तीन लाख, पाली को 1.40 लाख, उर्दू को 1.05 लाख, मराठी और फारसी को एक-एक लाख और तेलुगु को 80 हजार रुपये मिलेंगे। हिंदी विभाग को 13 लाख रुपये मिलेंगे।