वाराणसी। बीएचयू में सोमवार को संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) का उद्घाटन किया गया। अब बीएचयू के प्रोफेसरों को उद्यमिता पर मार्गदर्शन और व्यवसायिक गतिविधियों पर परामर्श दिए जाएंगे। सीडीसी भवन स्थित अटल इंक्यूबेशन सेंटर में प्रो. आशीष वाजपेयी ने कहा कि ज्ञान सिर्फ प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं है बल्कि व्यावहारिक महत्व भी है। हम लक्ष्य नहीं चुनते, आदतें चुनते हैं। आदतें ही हमारे लक्ष्यों को निर्धारित करती हैं और हमारी सोच से आदतें बनती हैं।
कार्यक्रम निदेशक डॉ. सौरभ चंद्रशेखरन ने कहा कि संकाय सदस्य ही छात्रों के पहले मार्गदर्शक होते हैं और वे उद्यमिता को एक व्यावहारिक कॅरिअर विकल्प के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं। तहत माइक्रो लैब में युवा उद्यमियों को मशीनों पर काम करने की ट्रेनिंग दी गई। गेमिफिकेशन, केस स्टडी, कहानी कहने की विधा, रोल मॉडल और सिमुलेशन तकनीक के बारे में बताया गया।
दृश्य कला संकाय के प्रो. मनीष अरोड़ा ने कहा कि अटल इनोवेशन मिशन, बायो-नेस्ट और बीएचयू के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की जानकारी दी। राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की मदद से शुरू किए गए स्वावलंबिनी महिला उद्यमिता कार्यक्रम के तहत एफडीपी की शुरुआत बीएचयू में की गई है।