जरूरत के मुकाबले 8 फीसदी ही काॅर्निया उपलब्ध
प्रो. आरपी मौर्य के अनुसार, ओपीडी में जांच के दौरान हर साल काॅर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित 250 से ज्यादा नए मरीज सामने आ रहे हैं। ऐसे मरीजों के लिए काॅर्निया प्रत्यारोपण ही उपचार का प्रमुख विकल्प है। इसके मुकाबले नेत्रदान से मिलने वाली काॅर्निया की संख्या बेहद कम है।
दो लाख काॅर्निया की जरूरत, 40 हजार की प्रत्यारोपण
भारत में करीब 1.50 करोड़ लोग दृष्टिबाधित हैं। इनमें 70 लाख से ज्यादा लोग काॅर्नियल ब्लाइंडनेस से प्रभावित हैं जिन्हें काॅर्निया प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। हर साल करीब 50 हजार नए काॅर्नियल ब्लाइंड मरीज जुड़ते हैं। देश में प्रतिवर्ष औसतन करीब दो लाख काॅर्निया की जरूरत होती है। करीब 40 हजार काॅर्निया का ही प्रत्यारोपण हो पा रहा है।
25 अगस्त से मनाया जा रहा नेत्रदान पखवाड़ा
नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 25 अगस्त से 8 सितंबर तक नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जाता है। इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से नेत्रदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों और गलतफहमियों को दूर करने का प्रयास किया जाता है। बीएचयू के नेत्र रोग विभाग के साथ स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी 8 सितंबर तक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- नेत्रदान को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां हैं। जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद पर्याप्त संख्या में लोग नेत्रदान के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। - प्रो. आरपी मौर्य, चेयरमैन व अध्यक्ष, क्षेत्रीय नेत्र संस्थान, आईएमएस बीएचयू