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बीएचयू: दो साल में दान में मिलीं सिर्फ 40 कॉर्निया, यह जरूरत से 92% कम; आईबैंक में लगातार बढ़ रही वेटिंग

Sat, 29 Aug 2026 09:02 AM IST
Aman Vishwakarma रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

बीएचयू आईबैंक में दो साल में दान से सिर्फ 40 कॉर्निया मिल सकीं, जो जरूरत से करीब 92 फीसदी कम हैं। वहीं, 2351 लोगों ने नेत्रदान की प्रतिज्ञा ली है। कॉर्निया की कमी के कारण आईबैंक में वेटिंग लगातार बढ़ रही है। जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है।

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आईएमएस बीएचयू। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आईएमएस बीएचयू के आईबैंक में 500 से ज्यादा मरीज दो साल से कॉर्निया मिलने का इंतजार कर रहे हैं। पिछले दो वर्षों में आईबैंक को केवल 40 कॉर्निया ही दान में मिली हैं जो जरूरत के मुकाबले 8 फीसदी ही है। यानी 92 फीसदी मरीज वेटिंग में हैं। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग आंखों में रोशनी आने का इंतजार कर रहे हैं।

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आईएमएस बीएचयू के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में आने वाले मरीजों की जांच की जाती है। हर साल औसतन 250 से ज्यादा मरीजों के कॉर्निया प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। दो साल में यह आंकड़ा 500 पहुंच जाता है। इसके लिए मरीजों का आईबैंक में पंजीकरण किया जाता है। जब नेत्रदान से कॉर्निया मिलती है तो मरीजों को प्रत्यारोपण किया जाता है। कॉर्निया मिल ही नहीं रही तो प्रत्यारोपण का काम भी लटका है। 

इससे नेत्र रोग संस्थान के डॉक्टर भी चिंतित हैं। आईबैंक में अभी 2351 लोगों ने नेत्रदान की प्रतिज्ञा ली है। इनके निधन के बाद नेत्रदान होने पर जरूरतमंद मरीजों को कॉर्निया उपलब्ध कराई जा सकेगी। अब तक नेत्रदान की रफ्तार धीमी है।

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जरूरत के मुकाबले 8 फीसदी ही काॅर्निया उपलब्ध
प्रो. आरपी मौर्य के अनुसार, ओपीडी में जांच के दौरान हर साल काॅर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित 250 से ज्यादा नए मरीज सामने आ रहे हैं। ऐसे मरीजों के लिए काॅर्निया प्रत्यारोपण ही उपचार का प्रमुख विकल्प है। इसके मुकाबले नेत्रदान से मिलने वाली काॅर्निया की संख्या बेहद कम है।

दो लाख काॅर्निया की जरूरत, 40 हजार की प्रत्यारोपण
भारत में करीब 1.50 करोड़ लोग दृष्टिबाधित हैं। इनमें 70 लाख से ज्यादा लोग काॅर्नियल ब्लाइंडनेस से प्रभावित हैं जिन्हें काॅर्निया प्रत्यारोपण की जरूरत होती है। हर साल करीब 50 हजार नए काॅर्नियल ब्लाइंड मरीज जुड़ते हैं। देश में प्रतिवर्ष औसतन करीब दो लाख काॅर्निया की जरूरत होती है। करीब 40 हजार काॅर्निया का ही प्रत्यारोपण हो पा रहा है।

25 अगस्त से मनाया जा रहा नेत्रदान पखवाड़ा
नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 25 अगस्त से 8 सितंबर तक नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जाता है। इस दौरान विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से नेत्रदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों और गलतफहमियों को दूर करने का प्रयास किया जाता है। बीएचयू के नेत्र रोग विभाग के साथ स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी 8 सितंबर तक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
  • नेत्रदान को लेकर लोगों में कई तरह की भ्रांतियां हैं। जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद पर्याप्त संख्या में लोग नेत्रदान के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। - प्रो. आरपी मौर्य, चेयरमैन व अध्यक्ष, क्षेत्रीय नेत्र संस्थान, आईएमएस बीएचयू
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इसे भी जानना जरूरी
  • नेत्रदान में पूरा नेत्रगोलक प्रत्यारोपित नहीं किया जाता। जरूरत के अनुसार, आंख के पारदर्शी हिस्से काॅर्निया (स्वच्छ पटल) का दान और प्रत्यारोपण किया जाता है।
  • कॉर्नियल ब्लाइंडनेस के मरीजों में काॅर्निया प्रत्यारोपण उपचार का प्रमुख विकल्प है।
  • उम्र, लिंग या धर्म के आधार पर नेत्रदान पर रोक नहीं है। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या चश्मा लगाने वाले लोग भी नेत्रदान कर सकते हैं। आंख का ऑपरेशन करा चुके व्यक्ति भी कई परिस्थितियों में नेत्रदान कर सकते हैं।
  • मृत्यु के बाद जल्द से जल्द आईबैंक या संबंधित नेत्रदान संस्था को सूचना देना जरूरी होता है। नेत्रदान की प्रक्रिया सामान्यतः कुछ ही समय में पूरी की जाती है। इसमें लगभग 10 से 15 मिनट लग सकते हैं।
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