बुजुर्ग को मिला नया जीवन
इस क्षति के परिणामस्वरूप सेप्टम नेक्रोसिस हो सकता है और सेप्टम में बाद में छेद हो सकता है। वीएसआर के रोगी अक्सर गंभीर रूप से बीमार होते हैं, जिससे कई गंभीर चुनौतियां सामने आती हैं। समय पर हस्तक्षेप के बिना, इस स्थिति में मृत्यु दर बहुत अधिक होती है। परंपरागत रूप से, सर्जिकल तरीके से छिद्र को बंद करना उपचार था, लेकिन यह काफी जोखिम के साथ था।
डॉ. विकास अग्रवाल ने पोस्ट-एमआई वीएसआर क्लोजर की तकनीकी कठिनाइयों को रेखांकित किया। खासकर बुजुर्ग रोगियों में। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैथ लैब की तकनीकों में प्रगति अब इन बीमारियों को कम से कम खतरे एवं बिना चीड़ फाड़ के साथ ठीक करना संभव बनाती है।
सीटीवीएस के विभागाध्यक्ष प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया ने कहा कि पहले इस तरह के रोगियों में ओपन हार्ट सर्जरी करनी पड़ती थी, जिसमें खतरा बहुत ज्यादा रहता था।