इसी अवधि में छात्राओं के अवकाश पर होने के कारण मेरे द्वारा छात्र हित में समाधान के लिए सेमिनार प्रस्तुतिकरण की तिथि एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी गई। ऐसे में उसकी समस्या का निस्तारण दो दिन पूर्व ही हो गया। इस समस्या के समाधान के बाद कुछ वरिष्ठ छात्राओं ने भी संबंधित छात्रा को सुझाव दिया।
इसी बीच पटना से एक दिन पहले छात्रा के एक अन्य सहयोगी ने विभाग बंद होने के बाद फोन पर बताया कि छात्रा केएन उडुप्पा सभागार के पास चिंतित है। विभागाध्यक्ष ने बताया कि इसकी जानकारी होने के बाद मैंने सभी छात्राओं को बुलाकर बातचीत की और वास्तविकता जानने का प्रयास किया, तो पता चला कि छात्रा चिंतित थी। इस पर उससे पूछा गया कि वह बातचीत करना चाहती है या अस्पताल में भर्ती कराया जाए। छात्रा के कहने पर उसके साथ संवाद किया गया और समस्या पूछी गई, लेकिन वह उत्तर नहीं दे रही थी, इसलिए उसे अस्पताल भिजवाया गया।
प्रो. नम्रता ने बताया कि चूंकि 19 मार्च को छात्रा महाराष्ट्र अपने घर जाना चाहती थी, लेकिन ऐसी स्थिति में उसके अभिभावक को बनारस बुलवाया गया। उन्होंने विभाग के कार्यों के बाद अस्पताल में भर्ती छात्रा से मुलाकात की और छात्रा को रात में अस्पताल से छुट्टी मिल गई। विभागाध्यक्ष ने घटना की पूरी विस्तृत जानकारी संकाय प्रमुख कार्यालय को भी दे दी है।