यह है जांच करवाने की वर्तमान व्यवस्था : डॉक्टर अगर किसी मरीज को जांच लिखते हैं तो सीसीआई लैब में काउंटर पर जाकर पहले पैसा जमा करने के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ता है। मरीज/ तीमारदार जब पैसा जमा कर लेते हैं तो उस रसीद को लेकर दूसरे काउंटर पर पंजीकरण के लिए लाइन में लगना पड़ता है।
फीस जमा रसीद और पंजीकरण का पर्चा लेकर अंदर जाने पर सैंपल देने के लिए भी लाइन लगानी पड़ती है। जांच के बाद रिपोर्ट लेने के लिए भी काउंटर पर लाइन लगानी होती है। फिर डॉक्टर को दिखाने पहुंचते हैं। इस तरह जांच की पूरी प्रक्रिया में 30 मिनट लग जाते हैं।
सीसीआई लैब में जांच की व्यवस्था को अपग्रेड करने की तैयारी चल रही है। एचआईएमएस यानी हॉस्पिटल इनफार्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम के तहत एक ही काउंटर पर फीस जमा करने, पंजीकरण करवाकर बार कोड लगवाने की सुविधा रहेगी। मरीजों को मोबाइल पर रिपोर्ट भी मिलेगी। इसमें 2-3 महीने लग सकते हैं। इसके बाद मरीजों को लाइन में लगने से छुटकारा मिल जाएगा। - प्रो. एसपी मिश्रा, प्रभारी, सीसीआई लैब, बीएचयू
केस 1- ककरमत्ता निवासी कविता पैर में दाने निकलने से परेशान थीं। डॉक्टर को दिखाया तो खून की तीन जांच लिखी। कविता बुधवार को सीसीआई लैब पहुंची। बताया कि फॉर्म लेकर पहले फीस जमा करने के लिए 5 नंबर काउंटर पर लगना पड़ा। 15 लोगों के बाद नंबर आया था। किसी तरह फीस जमा करने के बाद फिर 1 नंबर काउंटर पर पंजीकरण के लिए कहा गया।
केस 2- चंदौली निवासी मीना को सांस लेने में तकलीफ और पेट में दर्द की शिकायत थी। डॉक्टर को दिखाया तो जांच लिखी गई। मीना के साथ आए बेटे शुभम ने लाइन में लगकर फीस जमा किया। फिर व्यवस्था के तहत काउंटर पर लाइन लगाकर पंजीकरण करवाया। शुभम ने बताया कि दोनों काउंटर के बाद किसी तरह सैंपल देने पहुंचे। इसी पूरी प्रक्रिया में आधे घंटे लग गए।