आईसीयू में बेड मुहैया नहीं होने और सही इलाज नहीं मिलने से बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स की सोमवार भोर में मौत हो गई। इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए साथियों ने शव को वीसी आवास के गेट पर रखकर प्रदर्शन किया। करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारियों के आश्वासन पर ही प्रदर्शन खत्म हुआ।
उधर नर्सों ने विरोध में हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी। शाम को कुलपति ने स्टाफ नर्सों को बुलाकर बातचीत की और मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया तब जाकर सभी का गुस्सा शांत हुआ। हालांकि इस दौरान किसी तरह का कोई काम बाधित नहीं हुआ।
अस्पताल के चर्म रोग विभाग के वार्ड में तैनात बलिया निवासी मंजू (35) को एक जुलाई को रात 11 बजे तबियत बिगड़ने पर भर्ती कराया गया। यहां उसका इलाज डॉ. एलपी मीणा के निर्देशन में चल रहा था। इस बीच डॉक्टर ने आईसीयू में इलाज कराने को रेफ र किया।
इसके बाद जब परिवारीजन आईसीयू में गए तो वहां बेड खाली न होने की बात कहकर वापस कर दिया गया। इसी बीच भोर में 2.35 बजे उसकी मौत हो गई। इधर इसकी जानकारी मिलते ही सहयोगी स्टाफ नर्स वार्ड पहुंचे और हंगामा करने लगे।
आरोप लगाया कि आईसीयू में बेड समय से मिल गया होता और इलाज होता तो मंजू की जान बच जाती। सुबह 10 बजे साथी का शव लेकर सैकड़ों की संख्या में स्टाफ नर्स वीसी आवास पहुंचे और शव रखकर प्रदर्शन करने लगे।
कुलपति को लिखे पत्र में आईसीयू में तैनात डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई, अस्पताल के स्टाफ के लिए आईसीयू में बेड रिजर्व करने और मंजू के आश्रित को नौकरी दिलाने की मांग की। शाम को कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने स्टाफ नर्सों के प्रतिनिधियों को बुलाकर बातचीत की और बिंदुवार मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।