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बीएचयू अस्पतालः इलाज करने वालों ने ही बढ़ाया मरीजों का दर्द

Thu, 05 Apr 2018 04:06 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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पहले मारपीट और फिर हड़ताल कर दबाव बनाते हैं जूनियर डॉक्टर - फोटो : अमर उजाला
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बीमार होने पर लोग डॉक्टर के पास जाते हैं। उनको उम्मीद होती है कि यहां उनको सलाह और बीमारी दूर करने के लिए दवा भी दी जाएगी। महामना की बगिया में इसके उलट हो रहा है। यहां जिन पर इलाज की जिम्मेदारी है, वही डॉक्टर  समाज सेवा और मानव धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं।
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शपथ लेने के बावजूद डॉक्टर अपनी मांग मनवाने के लिए इस कदर दबाव पर उतर आए हैं कि बुधवार से लेकर अभी तक गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों का हड़ताल आज दूसरे दिन बी जारी है।

वह भी तब जब बुधवार की शाम पांच कुलपति प्रो. भटनागर ने प्रेस कांफ्रेंस कर हड़ताल खत्म होने की घोषणा की थी। लेकिन बैठक के बाद शाम छह बजे जूनियर डॉक्टर फिर से हड़ताल पर चले गए। इस कारण ऑपरेशन, ओपीडी सहित कई अन्य जांच सेवाएं प्रभावित है।
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हजार से भी ज्यादा मरीज हड़ताल खत्म होने के इंतजार में है। बीएचयू अस्पताल के परिसर में कई मरीज स्ट्रेचर पर लेटे हैं। मरीज और तीमारदार परेशान हैं। बुधवार की तुलना में आज गुरुवार को अस्पताल में काफी कम संख्या में रोगी आए। 

 बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है, जब अस्पताल में डॉक्टरों और छात्रों से नोकझोंक-मारपीट हुई हो। आए दिन ऐसी घटनाएं होती हैं लेकिन जब भी जूनियर डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज हो जाता है तो वे हड़ताल कर देते हैं। उनका मकसद केवल विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाना होता है।

हालांकि मंगलवार की घटना के लिए कौन दोषी है, यह तो जांच होने पर ही सामने आएगा। वैसे जूनियर डॉक्टरों ने छात्र को बेरहमी से पीटा है। छात्र के लंका थाने पर पहुंचने पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने भी कही।

छात्र की तहरीर पर नामजद मुकदमा तो नहीं दर्ज हुआ है लेकिन कार्रवाई के डर से ही जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। उधर, आम दिनों में चार से पांच हजार मरीज जहां आते थे वहीं बुधवार को 2800 मरीजों ने ही ओपीडी में पंजीकरण कराया। 
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कहीं माहौल बिगाड़ने की साजिश तो नहीं

बीएचयू अस्पताल में हड़ताल के कारण मरीज परेशान - फोटो : अमर उजाला
बीएचयू  का माहौल एक बार फिर बिगड़ने लगा है। हालांकि इसकी वजह मारपीट ही बताई जा रही है लेकिन इसके पीछे कुछ लोगों की साजिश भी मानी जा रही है। इसमें बीएचयू और सर सुंदरलाल अस्पताल के लोग भी शामिल हैं, जिन पर व्यवस्था की जिम्मेदारी है और वह हड़ताल खत्म कराने में असफल रहे।

बुधवार शाम पांच बजे कुलपति ने प्रेस कांफ्रेंस में चीफ प्रॉक्टर प्रो. रोयाना सिंह की ओर से दी गई जानकारी का हवाला देते हुए हड़ताल खत्म करने की घोषणा की लेकिन बाद में पता चला कि हड़ताल तो खत्म ही नहीं हुई थी। 

वकीलों ने दी बेमियादी आंदोलन की चेतावनी
अधिवक्ता घनश्याम मिश्रा के पुत्र आकाश मिश्रा पर अस्पताल में हुए जानलेवा हमले के मामले को बनारस और सेंट्रल बार एसोसिएशन ने गंभीरता से लिया है। गुरुवार को सुबह 11 बजे बनारस बार सभागार में साधारण सभा की संयुक्त बैठक बुलाई गई है। अधिवक्ताओं ने कहा है कि यदि दोषियों को सजा और पीड़ित को जल्द न्याय नहीं मिला तो बेमियादी आंदोलन किया जाएगा।

बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र श्रीवास्तव और महामंत्री रजनीश मिश्रा को बुधवार को पूर्व महामंत्री नित्यांनद राय सहित अन्य अधिवक्ताओं ने हस्ताक्षरयुक्त प्रस्ताव सौंपा।

अधिवक्ताओं ने कहा कि आकाश पर बीएचयू के डॉक्टरों ने उस समय हमला किया, जब वह बीमार था। डॉक्टरों ने धारदार हथियार से आकाश के सिर पर वार किया जो उनके आपराधिक आशय को दर्शाता है।

मामले के आरोपियों को बचाने के लिए लंका पुलिस लीपापोती न करे। डीएम और एसएसपी मामले में हस्तक्षेप कर दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करें।
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