बीमार होने पर लोग डॉक्टर के पास जाते हैं। उनको उम्मीद होती है कि यहां उनको सलाह और बीमारी दूर करने के लिए दवा भी दी जाएगी। महामना की बगिया में इसके उलट हो रहा है। यहां जिन पर इलाज की जिम्मेदारी है, वही डॉक्टर समाज सेवा और मानव धर्म का पालन नहीं कर रहे हैं।
शपथ लेने के बावजूद डॉक्टर अपनी मांग मनवाने के लिए इस कदर दबाव पर उतर आए हैं कि बुधवार से लेकर अभी तक गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ा। बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों का हड़ताल आज दूसरे दिन बी जारी है।
वह भी तब जब बुधवार की शाम पांच कुलपति प्रो. भटनागर ने प्रेस कांफ्रेंस कर हड़ताल खत्म होने की घोषणा की थी। लेकिन बैठक के बाद शाम छह बजे जूनियर डॉक्टर फिर से हड़ताल पर चले गए। इस कारण ऑपरेशन, ओपीडी सहित कई अन्य जांच सेवाएं प्रभावित है।
हजार से भी ज्यादा मरीज हड़ताल खत्म होने के इंतजार में है। बीएचयू अस्पताल के परिसर में कई मरीज स्ट्रेचर पर लेटे हैं। मरीज और तीमारदार परेशान हैं। बुधवार की तुलना में आज गुरुवार को अस्पताल में काफी कम संख्या में रोगी आए।
बता दें कि यह कोई पहला मामला नहीं है, जब अस्पताल में डॉक्टरों और छात्रों से नोकझोंक-मारपीट हुई हो। आए दिन ऐसी घटनाएं होती हैं लेकिन जब भी जूनियर डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज हो जाता है तो वे हड़ताल कर देते हैं। उनका मकसद केवल विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बनाना होता है।
हालांकि मंगलवार की घटना के लिए कौन दोषी है, यह तो जांच होने पर ही सामने आएगा। वैसे जूनियर डॉक्टरों ने छात्र को बेरहमी से पीटा है। छात्र के लंका थाने पर पहुंचने पर मौजूद पुलिस कर्मियों ने भी कही।
छात्र की तहरीर पर नामजद मुकदमा तो नहीं दर्ज हुआ है लेकिन कार्रवाई के डर से ही जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। उधर, आम दिनों में चार से पांच हजार मरीज जहां आते थे वहीं बुधवार को 2800 मरीजों ने ही ओपीडी में पंजीकरण कराया।