बीते सोमवार को बीएचयू में रेजीडेंट डॉक्टरों और छात्रों के बीच झड़प के बाद सर सुंदर लाल अस्पताल में हड़ताल जारी है। चार दिन से जारी हड़ताल की वजह से अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या एक तिहाई से भी कम रह गई है। इसके बावजूद सभी को इलाज नहीं मिल पा रहा। बीएचयू और जिला प्रशासन के साथ जूनियर डॉक्टरों की कई चरण की वार्ता हो चुकी है मगर कोई हल नहीं निकला है।
हड़ताल कब खत्म होगी, अभी इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। इधर, अस्पताल में अब ओपीडी से लेकर वार्ड तक बाउंसरों की तैनाती कर दी गई। इसके अलावा एमएस आफिस से लेकर अस्पताल परिसर में हर चैनल गेट के पास, ओपीडी हाल आदि जगहों पर पुलिस कर्मी भी तैनात कर दिए गए हैं। रेजीडेंट डॉक्टरों ने ही विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था के बजाय बाउंसरों की तैनाती की मांग की थी। पहले चरण में हालांकि 30 बाउंसर बुलाए गए हैं, आने वाले दिन में इनकी संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।
गंभीर बीमारियों से पीडि़त मरीज शुक्रवार को इलाज की उम्मीद में ओपीडी से इमरजेंसी तक भटकते रहे। इनमें से ज्यादातर दूर दराज से आए मरीज थे। कोई दूसरे तल पर तो कोई चौथे-पांचवें तल पर पहुंचा लेकिन वहां भी जब डॉक्टर नहीं मिले तो इमरजेंसी में पहुंचा। यहां भी रेजीडेंट डॉक्टरों के न होने की वजह से परेशानी झेलनी पड़ी।
सामान्य दिनों में सर सुंदरलाल अस्पताल की ओपीडी में पांच हजार से अधिक मरीज आते हैं। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से यहां आने वाले मरीजों की संख्या तेजी से कम हुई है। शुक्रवार को यह डेढ़ हजार के आस पास ही रही। इनमें भी काफी मरीज वे हैं, जो बिहार और मध्यप्रदेश के दूर दराज इलाकों से आए और जिन्हें हड़ताल की पूर्व से जानकारी भी नहीं थी।
सोमवार को मारपीट और उपद्रव की घटना के बाद सर सुंदरलाल अस्पताल के जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर मंगलवार से हड़ताल पर चल रहे हैं। शुक्रवार को भी कुलपति प्रो. राकेश भटनागर के साथ बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला।
छह महीने में दूसरी हड़ताल, प्रशासन नाकाम
सर सुंदरलाल अस्पताल परिसर में छाया सन्नाटा
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बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में पिछले छह माह में जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की यह दूसरी हड़ताल है। इससे पहले अप्रैल में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के छात्र के साथ सर्जरी विभाग में मारपीट के बाद रेजीडेंट डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। तब भी डॉक्टरों ने तीन दिन तक हड़ताल जारी रखी थी। वर्ष 2012 में पूर्व कुलपति प्रो. लालजी सिंह के कार्यकाल में 15 दिन हड़ताल चली थी।
आंत में सूजन, डॉक्टरों ने नहीं देखा
बिहार की कमला देवी की आंत में सूजन है। गुरुवार शाम को ही पति और पोती के साथ वाराणसी आ गई थीं। सुबह ओपीडी में आईं तो डॉक्टरों ने देखा नहीं। पूछने पर भी पता नहीं चल पा रहा है कि कब हड़ताल खत्म होगी और इलाज होगा।
इमरजेंसी में भी डॉक्टर नहीं मिले
अपने भतीजे के साथ अस्पताल आए औरंगाबाद निवासी प्रहलाद सिंह इलाज के लिए भतीजे को लेकर इधर-उधर भटकते रहे। बताया कि गुर्दे में संक्रमण की समस्या थी, औरंगाबाद से बीएचयू रेफर किया गया था। यहां पर्चा कटाने के बाद इमरजेंसी गए तो वहां भी डॉक्टर नहीं मिले।
रेजीडेंट डॉक्टरों ने आईएमएस गेट से निकाला मार्च
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हड़ताल कर रहे रेजीडेंट डॉक्टरों ने शुक्रवार को आईएमएस गेट से बीएचूय सिंह द्वार तक शांति मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने कहा कि जब तक सुरक्षा प्रबंध नहीं होंगे और सभी मांगों पर कार्रवाई का लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, वे काम पर नहीं लौटेंगे।