लालजी सिंह को मुखाग्नि देते बड़े बेटे अभिषेक सिंह
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बीएचयू के पूर्व कुलपति, देश के ख्यात वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ. लालजी सिंह सोमवार की देर शाम पंचतत्व में विलीन हो गए। मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके ज्येष्ठ पुत्र ने मुखाग्नि दी।
इस दौरान काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शुभचिंतकों, परिवारीजनों के अलावा प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। सूर्यास्त होने के कारण गार्ड आफ ऑनर नहीं दिया गया लेकिन उनके सम्मान में सुरक्षाकर्मी खड़े रहे।
इसके पहले डॉ. लालजी सिंह की शवयात्रा में उनके अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। रविवार की रात निधन होने की सूचना के बाद सुबह से ही उनके पैतृक गांव कलवारी में लोगों का तांता लगा रहा। वहां हजारों की संख्या में लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
हर किसी की आंखें नम
लालजी सिंह को श्रद्धांजलि देती पुलिस
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इस बीच, उनके बड़े बेटे अभिषेक सिंह जब हैदराबाद से आकर बनारस से अपनी माता अमरावती को लेकर घर पहुंचे तो माहौल बेहद गमगीन हो गया। पत्नी अमरावती और घर के अन्य सदस्यों ने पुष्पांजलि अर्पित की तो लोग फफक पड़े।
सोमवार को लगभग डेढ़ बजे पिंड दान के बाद पुत्र अभिषेक और परिवार के अन्य सदस्यों ने अर्थी उठाई तो उपस्थित जनसमूह की आंखें नम हो उठीं। पार्थिव शरीर को उनके प्रोजेक्ट जीनोम फाउंडेशन, राहुल महाविद्यालय कलवारी और आझूराय इंटर कालेज शेरवां ले जाया गया, जहां लोगों ने श्रद्धांजलि दी।
शव यात्रा में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं विधायक पारसनाथ यादव, पूर्व सांसद धनंजय सिंह, एमएलसी बृजेश सिंह प्रिंसू, जिला पंचायत अध्यक्ष राजबहादुर यादव, माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संतोष सिंह आदि शामिल थे। शाम को जौनपुर से शवयात्रा वाराणसी पहुंची।