अपर परीक्षा नियंता प्रो. जीपी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय के 100 वर्षो से ज्यादा की परंपरा में पहली बार ऐसा रहा कि अध्ययनरत छात्रों को उनके स्कोर के आधार पर सम्मानित किया गया। इस दाैरान कुलसचिव राजन श्रीवास्तव, छात्र अधिष्ठाता प्रो. रंजन कुमार सिंह सहित सभी संस्थानों के निदेशक, डीन और विभागाध्यक्ष रहे। हालांकि, इस बीच बीएचयू के परीक्षा नियंत्रक दर्शक दीर्घा में बैठे नजर आए, जिसको लेकर कई छात्रों ने सवाल भी खड़े किए
कैंपस जाने से पहले ही सम्मानित हुए तो मिलेगी प्रेरणा
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि शैक्षणिक उपलब्धियों को विश्वविद्यालय के कैलेंडर के केंद्र में रखने के लिए इन पुरस्कारों की शुरुआत की गई है। कहा कि हमारे विश्वविद्यालय के कैलेंडर में एक ऐसा दिन शामिल करने की जरूरत थी, जो उस मुख्य उद्देश्य का उत्सव मनाए जिसके लिए कोई विश्वविद्यालय अस्तित्व में होता है। आगे कहा कि इन विद्यार्थियों को हम तब सम्मानित कर रहे हैं जब वे हमारे परिसर में हैं, न कि उनके यहां से चले जाने के बाद। मेधा का सम्मान तब होना चाहिए जब वह दूसरों को सबसे अधिक प्रेरणा दे सके।