वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शताब्दी वर्ष के दौरान जल की समस्या पर अध्ययन के लिए वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट और लोक विद्याओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए लोक कला केंद्र की स्थापना की जाएगी। यह बात कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कही।
शताब्दी समारोह के सिलसिले में नगर के प्रबुद्ध नागरिकों की राय जानने के बाद बुधवार को उन्होंने कहा कि विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय के पैरामीटर अलग हैं और बीएचयू के स्थापना की भावना अलग। इसे भारत अध्ययन केंद्र के रूप में ही विकसित किया जाना चाहिए।
कुलपति ने कहा कि केंद्रीय मंत्री उमा भारती गंगा विश्वविद्यालय की स्थापना करना चाहती हैं लेकिन जब तक इसकी स्थापना होगी तब तक पानी की समस्या गंभीर रूप धारण कर लेगी।
हमने उनको प्रस्ताव दिया है कि बीएचयू अपने संसाधन से गंगा ही नहीं बल्कि जल प्रबंधन विश्वविद्यालय की स्थापना कर सकता है। इसके साथ ही अनौपचारिक ज्ञान को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे संवर्धित करने की भी तैयारी है। शताब्दी वर्ष में पुरातन छात्रों से अपील की जा रही है कि वे परिसर में कुछ समय बिताएं और छात्रों को अपनी विशेषज्ञता का लाभ देें।
परिसर में 32 फ्लैट्स हैं, उनमें पुरातन छात्रों के रहने की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा वर्ष पर्यंत संगोष्ठियां होंगी। इसकी शुरुआत 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती से की जा रही है। संचालन डॉ. विश्वनाथ पांडेय और धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. केपी उपाध्याय ने किया।