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बीएचयू को निगरानी वाली स्कीम स्ट्राइड में एक साल में संस्थानों ने भेजा चार हजार प्रोजेक्ट

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वाराणसी। देश के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जन सरोकारों और सामाजिक मुद्दों सहित अलग-अलग विषयों को लेकर होने वाले शोध को बढ़ावा देने की स्कीम फॉर ट्रांस डिसिपलिनरी रिसर्च फॉर इंडिया डेवलपिंग इकोनॉमी (स्कीम स्ट्राइड) में एक साल में शिक्षण संस्थानों से चार हजार प्रोजेक्ट आएं है। पिछले साल ही यूजीसी की ओर से इस स्कीम की शुरुआत की गई है। जिसमें सामाजिक, आर्थिक सहित विभिन्न क्षेत्रों में शोध के अवसर दिए जा रहे हैं। इसके लिए बीएचयू को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है। बीएचयू में ही देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों शिक्षण संस्थान से आने वाले प्रोजेक्ट का मूल्यांकन के बाद यूजीसी के उपाध्यक्ष की अध्यक्षता वाली कमेटी इस पर विचार कर मंजूरी दे रही है।
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अब विभिन्न विश्वविद्यालयों शिक्षण संस्थानों से अलग-अलग विषयों पर प्रोजेक्ट तैयार किए गए हैं। खास बात यह है कि तीन अलग-अलग चरण वाली इस स्कीम के पहले चरण में यूपी के रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली समेत देश के 22 विश्वविद्यालयों को प्रोजेक्ट की मंजूरी दी जा चुकी है। बीएचयू में स्ट्राइड सेल के समन्वयक प्रोफेसर बीके सिंह के मुताबिक विश्वविद्यालय शिक्षण संस्थानों आदि से 4000 आवेदन आए हैं। जिसमें अलग-अलग मुद्दों पर प्रोजेक्ट दिया है। बताया कि पहले चरण में करीब 300 आवेदनों में 22 प्रोजेक्ट को मंजूरी देते हुए उन्हें निर्धारित अनुदान भी दिया जा चुका है। अब दूसरे और तीसरे चरण के लिए करीब 3500 से अधिक आवेदन आए हैं जिनकी सूची तैयार करा ली गई है। लॉक डाउन की वजह से ही इस पर फैसला नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि यूजीसी की ओर से गठित सलाहकार समिति की मीटिंग में प्रोजेक्ट पर चर्चा के बाद मंजूरी दी जाती है।
संस्थानों को देना होता है प्रेजेंटेशन
जिन विश्वविद्यालय और शिक्षण संस्थानों की ओर से जो प्रोजेक्ट आए हैं उनको मंजूरी से पहले यूजीसी की सलाहकार समिति के सामने प्रदर्शन करना पड़ता है। यहां प्रदर्शन के बाद सलाहकार समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही उनके प्रोजेक्ट पर फैसला होता है।
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तीन अलग-अलग ग्रुप में स्कीम से जुड़े सकते हैं
बीएचयू स्ट्राइड्स सेल के समन्वयक प्रोफेसर बीके सिंह के मुताबिक तीन अलग-अलग ग्रुप में लोग स्कीम से लोग जुड़ सकते हैं। इसमें पहले ग्रुप में शिक्षण संस्थान, दूसरे में शिक्षकों के साथ ही तीसरे में एक साथ कई संस्थान आपस मे प्रोजेक्ट पर काम कर सकते हैं।
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