वहीं, इस सत्र से शुरू होने वाले तीन नए कोर्स में 12-12 सीटों पर प्रवेश होगा। इस साल पहली बार क्लीनिकल साइकोलॉजी में एमए, साइकेट्रिक सोशल वर्क मेंटल हेल्थ में एमए और साइकाट्री नर्सिंग में एमएससी की पढ़ाई होगी। ये तीनों कोर्स साइकाट्री विभाग की ओर से चलाए जाएंगे। अभी तक इन कोर्स पर डिप्लोमा और स्पेशल कोर्स ही कराए जाते थे, लेकिन अब पहली बार परास्नातक की डिग्री भी मिलेगी।
इन तीनों कोर्स की फीस 6720 रुपये सेमेस्टर है जबकि पेड सीटों के लिए 46720 रुपये देने होंगे। सीयूईटी पीजी की प्रवेश परीक्षा कराई जा चुकी है। अब एक से दो दिन में इसका आंसर की भी जारी हो सकता है। ऐसे में नया विषय होने के नाते अभ्यर्थियों में कटऑफ को लेकर काफी संदेह बना हुआ है। इन कोर्स की परीक्षा में भी बीएससी साइकोलॉजी और बीए सोशल वर्क में स्नातकों को योग्य माना गया है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और शिक्षा : अवसर और चुनौतियां विषय पर वक्ताओं ने रखे विचार
वाराणसी। मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र और अंतर सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को विशिष्ट व्याख्यान हुआ। मुख्य वक्ता भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (बीएचयू) के पूर्व निदेशक प्रो. राजीव संगल रहे। व्याख्यान का विषय कृत्रिम बुद्धिमत्ता और शिक्षा: अवसर और चुनौतियां रहा।
प्रो. राजीव संगल ने कहा कि भारत सरकार के नेशनल मिशन ‘भाषिणी’ एप के निर्माण की शुरुआत 2018 में हुई थी। इसमें विभिन्न अकादमिक संस्थानों के 70 रिसर्च समूहों ने मिलकर काम किया तथा इसका विकास किया। प्रो. राजीव ने कहा कि इसका उपयोग अत्यंत सावधानी से करने की आवश्यकता है। प्रो. संजय कुमार ने विचार रखे। कार्यक्रम में प्रो. कमलशील, प्रो. आरके मंडल, प्रो. आरके मिश्रा, प्रो. प्रभाकर सिंह, प्रो. अर्चना कुमार आदि मौजूद रहे।