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दिलों में बसते कैंपस की कहानी, किताबी ज्ञान ही नहीं, संस्कार भी सिखाता है बीएचयू

Sat, 11 Jan 2020 02:41 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।
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बीएचयू कैंपस से छात्र के रूप में पढ़ाई करने वाले कुछ लोग शिक्षक तो कोई चिकित्सक बनकर दूरदराज से आने वाले मरीजों की सेवा में लगे हैं। इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारियों, राजनेताओं, कलाकारों, साहित्यकारों की सूची में भी एक से बढ़कर एक लोगों का नाम शामिल हैं, जो यहां के पुरातन छात्र रहे हैं। इन सबके बीच विश्वविद्यालय के कई पुरातन छात्र हैं, जो यहां शिक्षक होने के साथ ही कई देशों के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कुलपति जैसे अहम पदों पर भी काबिज हैं।

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बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के छात्र और शिक्षक रहे अरुणांचल विवि के कुलपति प्रो. साकेत कुशवाहा और केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात के कुलपति प्रो. आरएस दूबे का कहना है कि बीएचयू जैसा कैंपस कम ही देखने को मिलता है। यहां किताबी ज्ञान के साथ ही संस्कारों की शिक्षा दी जाती है, जो कहीं भी नहीं मिलती है। 

बीएचयू से मिले संस्कारों से आगे बढ़ रहा हूं
बीएचयू से बाहर दो विश्वविद्यालयों का कुलपति होने के बाद भी बीएचयू की जिंदगी को ही जी रहा हूं। बीएचयू के विद्यार्थी के रूप में मिली शिक्षा, संस्कार के बल पर ही आगे बढ़ता जा रहा हूं। 1976 में कक्षा नौवीं में दाखिला लेने सेंट्रल हिंदू कमच्छा में आया। 1980 में बीएससी कृषि इसके बाद एमएससी और फिर 1992 में पीएचडी करने के बाद अफ्रीका में प्रोफेसर की नौकरी मिली।

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पहले मिथिला यूनिवर्सिटी में कुलपति और इस समय अरुणांचल विवि में कुलपति पद की जिम्मेदारी निभाने में कभी असहजता नहीं महसूस हुई। इसके पीछे मालवीय जी के आदर्श हैं। यह बीएचयू से मिले संस्कारों का ही देन है। बीएचयू ने जो कुछ सिखाया वह हर जगह काम आया है। -प्रो. साकेत कुशवाहा, कुलपति अरुणांचल विवि

बीएचयू में गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी मिसाल
बीएचयू कैंपस में गुरु-शिष्य की परंपरा की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। 1970 में कमच्छा में प्री यूनिवर्सिटी कोर्स में दाखिला लिया। इसके बाद बीएससी, एमएससी, पीएचडी करने के बाद शुरुआत में उड़ीसा में वैज्ञानिक तौर पर आईसीआर में सेवा देने के बाद दोबारा कैंपस में आने का सौभाग्य मिला। कुलपति के रूप में गुरुघासी दास विश्वविद्यालय बिलासपुर छत्तीसगढ़, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय बिहार में रहने के बाद वर्तमान में केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात गांधीनगर में कुलपति के रूप में सेवा दे रहे हैं। -प्रो. आरएस दूबे, कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात
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