पहले मिथिला यूनिवर्सिटी में कुलपति और इस समय अरुणांचल विवि में कुलपति पद की जिम्मेदारी निभाने में कभी असहजता नहीं महसूस हुई। इसके पीछे मालवीय जी के आदर्श हैं। यह बीएचयू से मिले संस्कारों का ही देन है। बीएचयू ने जो कुछ सिखाया वह हर जगह काम आया है। -प्रो. साकेत कुशवाहा, कुलपति अरुणांचल विवि
बीएचयू में गुरु-शिष्य परंपरा की अनूठी मिसाल
बीएचयू कैंपस में गुरु-शिष्य की परंपरा की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। 1970 में कमच्छा में प्री यूनिवर्सिटी कोर्स में दाखिला लिया। इसके बाद बीएससी, एमएससी, पीएचडी करने के बाद शुरुआत में उड़ीसा में वैज्ञानिक तौर पर आईसीआर में सेवा देने के बाद दोबारा कैंपस में आने का सौभाग्य मिला। कुलपति के रूप में गुरुघासी दास विश्वविद्यालय बिलासपुर छत्तीसगढ़, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय बिहार में रहने के बाद वर्तमान में केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात गांधीनगर में कुलपति के रूप में सेवा दे रहे हैं। -प्रो. आरएस दूबे, कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय गुजरात