बीएचयू और ओस्लो विश्वविद्यालय शिक्षण, शोध पर मिलकर करेंगे काम
- फोटो : अमर उजाला
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और नार्वे के ओस्लो मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय के बीच शिक्षण, शोध परियोजनाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में सहयोग को लेकर चर्चा हुई। 10 दिवसीय वाराणसी दौरे पर आए ओस्लो मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय कार्यालय में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी से मुलाकात की। इस दौरान विद्यार्थी एवं शिक्षक आदान-प्रदान कार्यक्रम, संयुक्त शोध परियोजनाएं और सांस्कृतिक–शैक्षणिक पहल जैसे विभिन्न सहयोग क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया।
कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ साझेदारियों से बीएचयू की वैश्विक उपस्थिति मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि संभावित सहयोग क्षेत्रों की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे विद्यार्थियों को अकादमिक और पेशेवर उत्कृष्टता के नए अवसर मिल सकेंगे। ओस्लो मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालय के प्रो. नुट ऑकलैंड ने बताया कि दोनों विश्वविद्यालयों के बीच पिछले दो दशकों से शैक्षणिक संबंध बने हुए हैं।
उन्होंने कहा कि बीएचयू और ओस्लोमेट की अकादमिक विविधता, समृद्ध विरासत और संस्थागत क्षमताएं दोनों को एक-दूसरे से सीखने और साझा करने का अवसर देती हैं। प्रो. ऑकलैंड ने बीएचयू के साथ औपचारिक सहयोग समझौता स्थापित करने की इच्छा जताई और कहा कि ओस्लोमेट, बीएचयू के उन विद्यार्थियों को फीस में छूट देने पर विचार करेगा जो वहां अध्ययन के लिए जाएंगे।
कला इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रो. ज्योति रोहिल्ला राणा ने कहा कि ओस्लोमेट का शिक्षा संकाय विश्वविद्यालय के प्रमुख संकायों में से एक है, और दोनों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी इस साझेदारी से परस्पर सीखने का अवसर पाएंगे। पर्यटन प्रबंधन विभाग के डॉ. प्रवीन राणा ने बताया कि पिछले 25 वर्षों में ओस्लोमेट के 16 प्रतिनिधिमंडल बीएचयू का दौरा कर चुके हैं। अब समय आ गया है कि इस लंबे शैक्षणिक संबंध को औपचारिक रूप देकर और सशक्त किया जाए। कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के समन्वयक प्रो. राजेश सिंह, पर्यटन प्रबंधन विभाग के डॉ. अनिल कुमार सिंह सहित अन्य शिक्षाविद मौजूद रहे।