समझौते के अनुसार, बीएचयू और अन्य सभी साझेदार संस्थान इस बौद्धिक संपदा का इस्तेमाल शिक्षा, शिक्षण और आगे के शोध कार्यों के लिए रॉयल्टी-मुक्त लाइसेंस के तहत कर सकेंगे। 22 अक्तूबर को बीएचयू की ओर से कुलसचिव राजन श्रीवास्तव और ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी की ओर से रिसर्च सर्विसेज की डिप्टी डायरेक्टर लिनेट फरकुहर ने ई-हस्ताक्षर कर अनुबंध की प्रक्रिया को पूरा किया।
85 मिलियन डॉलर का अनुदान : ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के प्रो. माइकल पेट्राग्लिया के नेतृत्व में संचालित इस केंद्र को ऑस्ट्रेलियन रिसर्च काउंसिल (एआरसी) की ओर से सात वर्षों के लिए 85 मिलियन डॉलर का अनुदान मिला है। इस प्रोजेक्ट में द ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी, मोनाश यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड और यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया जैसे संस्थान भी शामिल हैं।
शोध निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छपेंगे : प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के शुरुआत में जंतु विज्ञान विभाग और एआईएचसी एंड आर्कियोलॉजी के शोधकर्ता जुड़ेंगे। उसके बाद कुछ और विभागों को जोड़ने की कवायद होगी।
ग्लोबल साउथ का होगा डेटा बैंक
व्यवस्था लागू होने के बाद ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के प्रो. माइकल पेट्राग्लिया के नेतृत्व वाले एआरसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ट्रांसफॉर्मिंग ह्यूमन ओरिजिंस रिसर्च में बीएचयू की सक्रिय भागीदारी होगी। केंद्र में पार्टनर इन्वेस्टिगेटर बनाए गए बीएचयू के जंतु विज्ञान विभाग के प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे अब विशेष रूप से ग्लोबल साउथ से जुड़े डेटा को तैयार कर उसका विश्लेषण और वैज्ञानिक व्याख्या करेंगे।