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हिमालय व तिब्बती क्षेत्र के लोगों की भाषा बने भोट : नामग्याल

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केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान सारनाथ में लद्दाख के सांसद जमयांग सेरिंग नामग्याल ने छात्रों से हिमालयी और तिब्बती संस्कृति की मूल भोट भाषा पर विस्तार से चर्चा की। कहा कि इस बात का प्रयास किया जा रहा है कि भोट भाषा हिमालयी व तिब्बती क्षेत्र में रहने वालों की भाषा बने।
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संवाद से पहले सांसद नामग्याल ने लद्दाख के छात्र-छात्राओं से रूबरू होकर उनकी समस्याएं सुनीं। छात्रों ने कहा कि हाईस्कूल व इंटर की डिग्रियों को मान्यता नहीं है। ऐसे में उन्हें समस्या का सामना करना पड़ता है। सांसद ने विद्यार्थियों को समाधान का आश्वासन दिया। सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार लद्दाख में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा रिग्पा की स्थापना कर रही है। 95 प्रतिशत कार्य हो चुका है। भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। लद्दाख के सरकारी विद्यालयों में भोट भाषा पढ़ाने के लिए 246 शिक्षकों की भर्ती की गई है। इसे सीबीएसई पैटर्न में लाने का प्रयास है। तिब्बती संस्थान के कुलपति प्रो. वनछुक दोर्जे नेगी ने कहा कि भारतीय दर्शन, शास्त्र बौद्ध परंपरा तिब्बत गई। इसे तिब्बत के धर्मगुरुओं ने तिब्बती में अनुवाद किया। इस मौके पर कुलसचिव सुनीता चंद्रा, उपकुलसचिव हिमांशु पांडेय, सहायक सचिव प्रमोद सिंह, प्रो. सुशील कुमार मौजूद रहे।
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