संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी गद्य साहित्य में अपने बहुमूल्य योगदान से भारतेंदु जी युगपुरुष बन गए हैं। भारतेंदु बाबू की दूरदृष्टि आज भी प्रासंगिक है, सीखने योग्य है, भारतेंदु हरिश्चंद्र का दूसरा सबसे बड़ा योगदान हिंदी भाषा को नई चाल में ढालने का माना जाता है। हिंदी में नाटकों की शुरुआत भारतेंदु हरिश्चंद्र से मानी जाती है।
वह बृहस्पतिवार को खड़ी बोली हिंदी के जनक भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र की जयंती के उपलक्ष्य में हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। भारतेंदु जी की राष्ट्रवादी दृष्टि विषयक एकदिवसीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि भारतेंदु हरिश्चंद्र के व्यक्तित्व व कृतित्व से युवा पीढ़ी को न सिर्फ राष्ट्रवाद बल्कि राष्ट्र निर्माण में योगदान की भावना को भी सीखने की जरूरत है। बीएचयू के प्रो. सदानंद शाही ने बाबू हरिश्चंद्र को राष्ट्रनायक की संज्ञा दी। हरिश्चंद्र पुरातन छात्र एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीनाथ त्रिपाठी ने महाविद्यालय द्वारा आयोजित भारतेंदु जयंती के अनवरत आयोजन की प्रशंसा की। इस अवसर पर पुरातन छात्र एसोसिएशन की तरफ से स्मारिका का विमोचन भी किया गया। स्वागत प्राचार्य डॉ. अनिल प्रताप सिंह ने किया। आयोजन सचिव डॉ. प्रभाकर सिंह ने अतिथियों को सम्मानित किया। इस दौरान भारतेंदु परिवार से दीपाली चौधरी, डॉ.ओम प्रकाश सिंह, डॉ. पंकज सिंह, प्रबंधक बिमल कुमार जैन ने भी विचार व्यक्त किए। मौके पर डॉ. अतुल कुमार तिवारी, डॉ.पीके पांडेय, डॉ. उदयन मिश्र, डॉ. बृजेश कुमार जायसवाल, डॉ. जगदीश सिंह, डॉ. देवाशीष सिंह मौजूद रहे। संचालन डॉ. ऋ चा सिंह व डॉ. राम आशीष सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सचिव डॉ. प्रभाकर सिंह ने किया।