निभाई गई सत्तर साल पुरानी रवायत, रोजेदारों ने किया उस्ताद को याद
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भारतरत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के वाराणसी के हड़हा सराय स्थित आशियाने पर रोजा इफ्तार हुआ। मौलाना सैयद मोहम्मद अकील हुसैनी ने नमाज अदा कराई। नमाज के बाद लोगों ने इफ्तार किया। खजूर, शरबत और पानी से रोजा खोला।
दस्तरख्वान पर तमाम तरह की निअमतें सजी थीं लेकिन लाइट न रहने की वजह से रोजेदारों का गर्मी से बुरा हाल था। यही नहीं, रोजेदारों ने उनके घर पर पहुंचने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
वजह ये कि बेनियाबाग अखाड़े से लेकर उनके घर तक जाने वाले रास्ते में गंदगी और सीवर ओवरफ्लो कर रहा था। रोजेदारों ने इस पर खासी नाराजगी जताई। इफ्तार के बाद मौलाना अकील हुसैनी ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि उस्ताद जितने बड़े फनकार थे उससे कहीं ज्यादा जिंदादिल इंसान थे।
उन्हें रहती दुनिया तक याद किया जाएगा। मजलिस के बाद उनका खास नौहा ‘मारा गया है तीन से बच्चा रबाब का...’ सैयद फरमान हैदर और बाकर हुसैन ने पढ़ा। अंजुमन हैदरी ने नौहाख्वानी की।
उस्ताद की रूह की मगफिरत के लिए दुआ की गई। लोगों ने उस्ताद को शिद्दत से याद किया। आने वालों का इस्तकबाल उनके बेटे काजिम हुसैन और शुक्रिया नाजिम हुसैन ने अदा किया।