विश्वनाथ मंदिर के मुख्य द्वार के पास भैरव कोठी मंदिर का शिखर शुक्रवार को बंदरों की उछलकूद से टूटकर गिर गया। तेज आवाज के साथ विश्वनाथ गली में शिखर गिरने से अफरातफरी मच गई। लाइन में लगे एक भक्त के पैर में चोट भी आई। यह हादसा तब हुआ जब बंदरों को पकड़ने का ठेका लेने वाली मथुरा की टीम मंदिर परिसर में पिंजरा लगाकर चारा डाल रही थी। शोर मचने पर वहां पहुंची पुलिस ने दर्शनार्थियों को मौके से हटाया।
मालूम हो कि इससे पहले दंडपाणि के शिखर, बिजली के तारों के अलावा ज्ञानवापी में पीपल की डाल भी कई बार बंदरों के उत्पात से टूटकर गिर चुकी है। शनिदेव चैनल के सामने स्थित प्राचीन भैरव कोठी मंदिर का एक शिखर दिन में करीब साढ़े 11 बजे तब गिरा जब विश्वनाथ गली में दर्शनार्थियों की लंबी लाइन लगी थी। करीब 10 किलो से अधिक वजनी कांक्रीट का शिखर गली में गिरने के बाद लुढ़क कर एक श्रद्धालु के पैर से टकरा गया। इससे उसे चोट आई।
जानकारी मिलने के बाद पास में तैनात पुलिस और सीआरपीएफ के जवान मौके पर पहुंच गए। ज्ञानवापी कंट्रोल रूम को भी जानकारी दी गई। हादसे के समय मथुरा से बंदरों को पकड़ने के लिए आई टीम मंदिर परिसर में पिंजरे में केला, चना डालकर उन्हें पकड़ने की कोशिश में जुटी रही लेकिन बंदर दूसरे भवनों की छतों या मंदिरों की ओर भाग गए थे।
तीन दिन में पकड़े गए 128 बंदर
वाराणसी। बंदरों को पकड़ने के लिए चलाए गए अभियान के तीसरे दिन विश्वनाथ मंदिर परिसर में विशेषज्ञ टीम को निराशा हुई। शाम तीन बजे तक मशक्कत के बाद सिर्फ 20 बंदर ही पकड़े जा सके। इससे पहले गुरुवार को 58 और बुधवार को 50 बंदर पकड़े गए थे। अब तक सिर्फ 128 बंदरों को ही पकड़ा जा सका। जबकि परिसर में एक हजार से अधिक बंदरों के होने का अनुमान लगाया गया था।