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भाई दूज: बहनों ने भाइयों की लंबी आयु के लिए रखा कठिन व्रत, जुबान पर लगाए काटे; यमराज से जुड़ी है यह परंपरा

Thu, 23 Oct 2025 01:19 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Bhai Dooj 2025: काशी नगर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। महिलाओं और युवतियों ने घर के बाहर गोबर का लेपन कर पूजन स्थल बनाया। इसके बाद यहां भाई दूज की कथाएं सुनी गईं।
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भाई दूज की पूजन करतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भाई दूज के पर्व पर बहनों ने अपने भाइयों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखकर पूजन किया। परंपरा के अनुसार बहनों ने गोबर से आंगन में बिछू, नदी, सूर्य, चंद्रमा, तुलसी का पौधा, सांप, भेड़, शेर और चूल्हा आदि आकृतियां बनाकर उसकी विधि-विधान से पूजा की।

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इसके बाद भाइयों की रूई पर 'आयु' बनाकर उनकी दीर्घायु की कामना की। माना जाता है कि यह व्रत भाइयों की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए किया जाता है।

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आयु बनाकर हुआ पूजन। - फोटो : अमर उजाला
क्या है भाई दूज की पौराणिक कथा
मान्यता के अनुसार, भाई दूज का पर्व यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा है। कहा जाता है कि सूर्यपुत्र यमराज अपने कार्यों में इतने व्यस्त रहते थे कि कई बार बहन यमुना के निमंत्रण के बावजूद उनके घर नहीं जा पाते थे। एक दिन यमराज अचानक यमुना के घर पहुंचे। बहन यमुना ने अपने भाई का आदरपूर्वक स्वागत किया, उनके माथे पर तिलक लगाया और अपने हाथों से भोजन कराया।

यमराज अपनी बहन के स्नेह से अत्यंत प्रसन्न हुए और वरदान देने को कहा। यमुना ने प्रार्थना की कि भैय्या, आप हर वर्ष इस दिन मेरे घर अवश्य आएं और जो बहन इस दिन अपने भाई का तिलक करे, उसे आपके भय का सामना कभी न करना पड़े। यमराज ने उनकी बात स्वीकार की और वरदान दिया। तभी से भाई दूज या यम द्वितीया का पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है।

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