शुक्रवार को सुबह रक्षाबंधन के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 5:41 बजे से 9:18 बजे तक विशिष्ट माना गया है। उन्होंने बताया कि इस दिन शतभिष नक्षत्र रहेगा। अति गंड योग, शोभन, श्रीवत्स, सोम्य, विजय योग रहेगा। ग्रहों के गोचर के चलते रक्षाबंधन पर चंद्रादि और बुध आदित्य, विमल विपरीत राजयोग, धन, उभयचरी योग, शकट और सुनफा योग जैसे योग का भी निर्माण हो रहा है। प्रो. नागेंद्र पांडेय ने बताया कि रक्षाबंधन पर रक्षासूत्र बांधते समय कर्मकांडी पंडित या आचार्य येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल... का उच्चारण करते हैं, तो इसका संबंध राजा बलि से स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर हो जाता है।
उच्च राशि में होंगे चंद्रमा और सूर्य रक्षाबंधन पर ग्रह गोचर के अनुसार चंद्रमा कुंभ राशि और सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में रहेंगे। सूर्य के सिंह राशि में होने से अत्यंत प्रबल माने जाते हैं। साथ ही गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में होंगे, जो ज्ञान, विद्या, यश और बुद्धि देंगे।
गोपाल मंदिर में ठाकुर जी को भक्त बांधेंगे राखी रक्षाबंधन पर वैष्णवजन विशेष पूजा भी होती है। चौखंभा स्थित षष्ठपीठ गोपाल मंदिर में पीठाधीश्वर गोस्वामी श्याम मनोहर महाराज परिवार के साथ ठाकुर जी राखी बांधेंगे। इसके साथ वैष्णवजन रक्षाबंधन का पर्व मनाएंगे। इस्कॉन मंदिर, हरे रामा हरे कृष्ण सोसाइटी की अगुवाई में अनुयायी राधा-कृष्ण को राखी बांधेंगे।