दक्षिण के सावन में 12 दिन बाकी, होती है शिव-गौरी की पूजा
वाराणसी। देश के पूर्वी और पश्चिमी राज्यों में श्रावण मास खत्म हो गया है, मगर दक्षिण और पश्चिम के राज्यों में सावन के 12 दिन अभी और बचे हैं। वहां 10 सितंबर को अमावस्या पर सावन की पूर्णाहुति होगी। उनका तीसरा सोमवार 31 अगस्त और चौथा सोमवार सात सितंबर को पड़ेगा। काशी में रह रहे पंच द्रविड़ राज्यों के लोग शिव-गौरी का पूजन-अर्चन कर रहे हैं। नवविवाहिताएं विशेष उत्सव मना रही हैं।
पंच द्रविड़ राज्यों में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गुजरात का कच्छ क्षेत्र आता है। यहां पंच द्रविड़ पंचांग में हिंदू मास अमावस्या से शुरू होकर अमावस्या को ही समाप्त होता है। श्रीकाशी महाराष्ट्र सेवा समिति के ट्रस्टी संतोष सोलापुरकर ने बताया कि सावन (श्रावण) उत्तर भारत के मुकाबले दक्षिण में करीब 15 दिन बाद शुरू होता है। क्योंकि यहां अमांत कैलेंडर माना जाता है, जिसमें मास अमावस्या के बाद शुरू होता है। सावन पूजा-पाठ के साथ त्योहारों, खान-पान के विशेष नियमों और प्रकृति के उत्सव का महीना है।
भादो मास के व्रत और पर्व 26 तक
31 अगस्त कजरी तृतीया, संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत, दो सितंबर हलषष्ठी व्रत, तीन को श्रीशीतला सप्तमी व्रत, चार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, कालाष्टमी व्रत, सात को अजा एकादशी व्रत, आठ को प्रदोष व्रत, नौ को शिवरात्रि व्रत, 10 को श्राद्ध की अमावस्या, 11 को स्नान-दानादि की अमावस्या, 14 को हरितालिका तीज, वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत, 16 को ऋषि पंचमी, 17 को सूर्य षष्ठी व्रत लोलार्क छठ, 19 को श्रीदुर्गा अष्टमी व्रत, श्रीराधा अष्टमी व सोरहिया मेला, 22 को जलझूलनी एकादशी व्रत, 23 को वामन द्वादशी, 24 को प्रदोष व्रत, 25 को अनंत चतुर्दशी और 26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा है।
10 दिनों तक चलेगा गणेशोत्सव
मुंबई के बाद काशी में खासकर मराठी समाज में गणेशोत्सव 10 दिनों तक चलेगा। सार्वजनिक गणेशोत्सव सात से 10 दिन तक होगा। पूजा पंडाल सजाए जाएंगे। लोग पूजन-अर्चन करेंगे। सार्वजनिक पंडालों में गणेश की मूर्तियों की स्थापना, दैनिक प्रार्थना, प्रसाद चढ़ाना और भक्ति गीत गाना शामिल है। इसके बाद प्रतिमाएं विसर्जित की जाएंगी। वहीं, घरों और समितियों में डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच, सात और 10 दिन का उत्सव मनाया जाएगा।