वाराणसी के भदैनी में हुए पांच लोगों की हत्या के खुलासे को लेकर पुलिस कई महीनों से प्रयास कर रही थी। आरोपी विक्की पकड़ से बाहर चल रहा था। यह मामला एसटीएफ के हाथ में चला जाता कि तकनीक ने आरोपी को पकड़वाने में भरपूर साथ दिया।
भदैनी निवासी एक परिवार के पांच सदस्यों की हत्या के आरोपियों की धरपकड़ में कमिश्नरेट की पुलिस को डेटा एनालिटिक्स और इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (आईपीडीआर) एनालिसिस की मदद से कामयाबी मिली।
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पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कहा कि समय बीतता जा रहा था और सफलता नहीं मिल रही थी। बीच में ऐसा लगने लगा था कि मुकदमा लिखा-पढ़ी में एसटीएफ को सौंप दिया जाए। हालांकि, अंतत: तकनीकी जानकार को तकनीक की मदद से कमिश्नरेट की पुलिस ने ही पकड़ा।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि एक रणनीति के तहत हमने विक्की के छोटे भाई जुगनू को पूछताछ के बाद छोड़ दिया था। हम उसकी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से मॉनिटरिंग कर रहे थे।
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डेटा एनालिटिक्स के तहत दोनों घटनास्थल के लगभग 500 मीटर के दायरे के सभी मोबाइल नंबर की गहनता से छानबीन की गई। देखा गया कि अभियुक्त से कॉल या अन्य माध्यमों से कौन-कौन कनेक्ट था।
आईपीडीआर एनालिसिस से यह पता लगाया गया कि मोबाइल उपयोगकर्ता ने इंटरनेट पर कहां और क्या किया है। इसके अलावा इंटरनेट टेलीफोनी का उपयोग करके कितने कॉल और संदेश भेजे हैं। आईपीडीआर एनालिसिस से ही यह पकड़ में आया कि जुगनू अपने बड़े भाई विक्की से इंस्टाग्राम और फेसबुक की फर्जी आईडी के मेसेंजर से संपर्क करता है। दोनों की चैटिंग लोकेशन पता करके फिर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
पुलिस आयुक्त ने कहा कि खुलासे के लिए सर्विलांस प्रभारी रोजाना रात में साथ बैठते थे। काशी जोन के डीसीपी और एडीसीपी के अलावा एसओजी प्रभारी और भेलूपुर थानाध्यक्ष ने भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन अच्छे तरीके से किया। अब दोनों भाइयों के खिलाफ जल्द ही अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। दोनों भाइयों को कठोरतम दंड दिलाने के लिए पुलिस मुकदमे की पैरवी प्रभावी तरीके से करेगी।