वाराणसी में मंगलवार को लोहटिया स्थित अयोध्या भवन में श्री चित्रकूट रामलीला के भरत मिलाप कार्यक्
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वाराणसी। भरत जी पृथ्वी पर पड़े हैं। उठाए नहीं उठ रहे हैं। भगवान राम ने उन्हें जबरदस्ती उठाकर हृदय से लगा लिया। उनके सांवले शरीर के रोम-रोम खड़े हो गए। नवीन कमल के समान नयनों में प्रेम के आंसुओं की धार बह चली।
श्री चित्रकूट रामलीला समिति के अयोध्या भवन का नजारा मंगलवार की शाम को बदला-बदला रहा। अयोध्या भवन के आसपास के मकानों की छतों पर श्रद्धालु टकटकी लगाए प्रभु श्रीराम की लीला का वंदन कर रहे थे। नेमियों ने प्रभु की राह में फूल बिछाए और मिलन की नयनाभिराम झांकी को आंखों में संजोने के लिए टकटकी लगा ली। 477 साल पुरानी परंपरा के साक्षी बने नेमियों की आंखें चारों भाईयों के मिलन को देखकर सजल हो उठीं। शाम 4:40 बजे जैसे ही भगवान श्रीराम ने भरत को अपने गले से लगाया तो चारों दिशाओं में जय श्रीराम का जयघोष गूंज उठा। काशी वासियों ने प्रभु की इस लीला का साक्षी बनने का सौभाग्य हासिल किया। कोरोना संक्रमण के कारण प्रशासन की अनुमति से केवल सौ लोगों की अनुमति मिली थी। भरत मिलाप के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए अयोध्या भवन के दरवाजे खोल दिए गए। सोशल डिस्टेंसिंग के साथ श्रद्धालुओं ने चारों स्वरूपों का दर्शन कर आशीर्वाद लिया। स्वरूपों की आरती पं. मुकुंद उपाध्याय ने उतारी।