शास्त्रों में बहुत उत्तम माना जाता है यह संयोग
हस्त नक्षत्र सुबह 9:25 बजे तक और उसके बाद दिन भर चित्रा नक्षत्र रहेगा। शुक्ल योग रात 10:15 बजे तक रहेगा। चंद्रमा और शुक्र का कन्या राशि में गोचर भी श्रद्धालुओं के लिए फलदायी होगा। सुबह हस्त नक्षत्र और शाम को चित्रा नक्षत्र और तृतीया तिथि के साथ चतुर्थी तिथि का संयोग शास्त्रों में बहुत ही उत्तम माना जाता है।
बीएचयू के ज्योतिष विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार हस्त नक्षत्र युक्त तृतीया तिथि होने के कारण तीज की पूजा पूरे दिन में कभी भी कर सकते हैं। ज्योतिषविद विमल जैन के अनुसार तृतीया तिथि का समापन छह सितंबर को दोपहर में 3:02 बजे होगा।
हरतालिका तीज की सुबह की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:03 बजे से 8:34 बजे तक रहेगा। पंचांग के अनुसार तीज के पूजन के लिए दो घंटे 31 मिनट का मुहूर्त सबसे उत्तम रहेगा। इसके बाद शाम की पूजा के लिए 5:27 बजे से 6:37 बजे तक का मुहूर्त सबसे उत्तम रहेगा।