भगवान शिव की नगरी काशी में प्रभु रामनाम का तारकमंत्र तो देते हैं, वहीं, काशी में प्रवाहमान जीवनदायनी मां गंगा के तट के पांच घाटों पर स्नान करने से पांच तीर्थों का फल मिलता है। स्नान से हरिद्वार, कांचीपुरी, प्रयाग के संगम, केदारधाम जैसे तीर्थों में स्नान करने का पुण्य लाभ मिल जाते हैं। यह स्नान वैशाख मास की अक्षय तृतीया से पूर्णिमा तिथि तक होते हैं।
आदिकेशव घाट से मणिकर्णिका घाट तक विष्णु काशी और मणिकर्णिका से अस्सी घाट तक शिव काशी कहा गया है। इनके बीच स्नान का विशेष महत्व है। स्कंदपुराण के काशी खंड में पंच तीर्थी स्नान का भी वर्णन है। वैशाख मास में अक्षय तृतीया से पूर्णिमा तिथि यानी 12 दिनों तक ही स्नान होता है। जिनको इसकी जानकारी होती है, वह यहां स्नान कर पांच तीर्थों के फल के अलावा मुक्तिधाम तक की पुण्य लाभ को प्राप्त कर लेते हैं।
आचार्य राजेश कुमार मिश्र एव काशी प्रदक्षिणा दर्शन यात्रा समिति के संचालक उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि पंच तीर्थों के स्नान पांच घाटों पर होते हैं। मगर विष्णु और शिव काशी के क्षेत्र के पौराणिक घाटों और भगवान विष्णु के मंदिरों में दर्शन पूजन का भी विशेष महत्व है। अस्सीघाट पर स्नान कर संकल्प के साथ शुरू होकर मणिकर्णिका घाट पर संकल्प को पूर्ण करते हैं।
पांच तीर्थों पर स्नान व दर्शन
अस्सी घाट पर स्नान से हरिद्वार तीर्थ (दर्शन-असि संगमेश्वर), प्रयागघाट पर स्नान से संगम (दर्शन-प्रयागेश्वर), आदिकेश्व घाट के पास वरुणा-गंगा संगम पर स्नान का पादोदक तीर्थ (दर्शन-वरुणा संगमेश्वर, केशवादित्य, आदिकेशव व ज्ञान केशव), पंचगंगा घाट पर स्नान कांचीपुरी व विष्णु कांची तीर्थ (दर्शन बिंदु विनायक व बिंदु माधव) तथा अंतिम तीर्थ मणिकर्णिका घाट पर गंगा व चक्रपुष्करिणी कुंड में स्नान (दर्शन-मणिकर्णिकेश्वर महादेव) होता है।
पितृलोक यात्रा में नहीं होती है जल की कमी
वैशाख में स्नान का विशेष महात्मय है। इस मास में गंगा, तीर्थों के अलावा नदियों में स्नान कर दान दिया जाता है तो व्यक्ति के मरने के बाद पितृलोक यात्रा के दौरान उनके परिजन अगर जल नहीं देते हैं, तब भी उनको जल की कमी नहीं होगी।
150 श्रद्धालुओं ने तीर्थों का स्नान
काशी प्रदक्षिणा दर्शन यात्रा समिति के बैनर तले रविवार को 150 श्रद्धालुओं ने पंच तीर्थी स्नान किया। उन्होंने असि, केदारघाट, प्रयागघाट, आदिकेशव घाट, त्रिलोचन घाट, पंचगंगा घाट, मणिकर्णिका घाट पर स्नान कर देव विग्रहों का दर्शन पूजन किए। संस्था के संचालक उमाशंकर गुप्ता के नेतृत्व में सुबह से शाम तक दो नाव से इन घाटों पर जाकर स्नान-दान किया।