बनारसी साड़ी को पसंद करने वाले और उसके कारीगरों के लिए जीएसटी के हवाले से बुरी खबर है। साड़ी को जिस धागे (जरी) से खास चमकीली कलात्मक बुनावट मिलती है उस धागे पर पांच प्रतिशत के टैक्स का प्रावधान किया गया है।
इसके चलते कारीगरी से जुड़े परिवार चिंतित हैं, जरी की कढ़ाई वाली साड़ियों के उत्पादन में गिरावट आने की आशंका है। हालांकि, बनारसी साड़ी पर न पहले कोई टैक्स था और न ही जीएसटी में कोई प्रावधान है। चाहे सुहाग का जोड़ा हो या सजने-संवरने का कोई खास अवसर।
हर नारी की पहली पसंद बनारसी साड़ी होती है। सुंदरता की चाहत के तौर पर बनारसी साड़ी की दुनिया में पहचान उसकी कलाकारी है। यह कलाकारी जरी से होती है। तांबे को गलाकर चांदी और सोने की पॉलिश से तैयार होने वाली जरी के धागे पर जीएसटी लागू होने से यह महंगा हो जाएगा।
पीली कोठी के बुनकर इकबाल अहमद बताते हैं कि जरी पर अब तक किसी तरह का टैक्स नहीं लगता था। जीएसटी लगने के बाद अब बनारसी साड़ी महंगी हो जाएगी। वैसे भी मंदी के चलते कीमत नहीं निकल पा रही थी। अब टैक्स लगने से दाम नहीं निकल पाएगा।
साड़ी पर जरी की कढ़ाई में पूरे परिवार के साथ खटने वाले मुख्तार आलम का कहना है कि जरी पर जीएसटी लगने के बाद बनारसी साड़ी की कला पर संकट आना तय है। इस कारीगरी से जुड़े 35-40 हजार कारीगर सीधे प्रभावित होंगे। जरी खरीदने में कारीगर हिचकेंगे।