पूर्वी यूपी का सबसे गर्म शहर बुधवार को बनारस रहा। पूरे दिन उमस से लोग त्रस्त हो गए। तीखी धूप के बीच बारिश वाली नमी हवा में घुलती रही और उमस बनकर बेहाल कर दिया। शहर का ताप सूचकांक 40 से 50 के बीच में आया। यानी कि वास्तविक तौर पर महसूस होने वाली गर्मी।
वहीं बुधवार को बनारस का अधिकतम तापमान सामान्य से 0.4 डिग्री नीचे 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, बीते 10 वर्ष में पहली बार मानसून 10 दिन पहले बनारस में दस्तक दे सकता है। हर साल 15 से 20 जून के बीच ही मानसून काशी में पहुंचता है। लेकिन इस बार 10 जून तक आने का संकेत मिल रहा है।
बनारस का न्यूनतम पारा 2.5 डिग्री ऊपर 28.9 डिग्री सेल्सियस आ गया। हवा की गति 20 किमी प्रति घंटे रही। वहीं नमी 80 फीसदी तक पहुंच गई। मौसम विज्ञान के अनुमान के उलट काशी में बारिश की बूंदाबांदी भी नहीं नसीब हो रही है। बुधवार को भी कुछ देर के लिए बादल छाए, लेकिन बिना बारिश के ही लौट गए।
बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि इतनी गर्मी है कि हवा में नमी सोखने की क्षमता ही बढ़ जा रही है। तापमान थोड़ा कम होता तो बारिश अच्छी होती। केंद्र का अनुमान है कि इस सप्ताह 4 दिन तक बारिश का अनुमान है।
10 साल में दो बार 15 दिन की देरी से पहुंचा मानसून
बीते 10 साल में पहली बार मानसून के इतनी जल्दी आने के संकेत मिले हैं। हर साल 15 से 20 जून के बीच ही मानसून काशी में पहुंचता है। वहीं 10 साल में दो बार मानसून अपने समय से 15 दिन देरी 29 जून और 30 जून को आया। फिलहाल इस साल 10 जून तक मानसून बनारस में दस्तक दे सकता है।
2014, 2015 और 2024 में मानसून अपने तय समय से 15 दिन विलंब से आया। जबकि बाकी वर्षों में यह तय समय या इससे एक-दो दिन देरी से आया। 2014 में मानसून की देरी के पीछे वजह था अरब सागर में आया नानूक चक्रवात। 2015 की वजह स्पष्ट नहीं है। वहीं 2024 में मानसून 10 दिनों तक बंगाल और बिहार की सीमा पर ही अटक गया था।