बनारस की हवा ऑरेंज और दो दिन रेड जोन में रहीं।
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बनारस की हवा में पिछले एक साल से काफी सुधार है। वर्ष भर के आंकड़ों पर गौर करें तो बनारस की हवा पिछले साल से लगातार ग्रीन जोन में है। 366 दिनों में 306 दिन बनारस की हवा सबसे बेहतर रही है। वहीं, एयर क्वालिटी इंडेक्स का आंकड़ा 100 और 50 के नीचे ही रिकॉर्ड किया जा रहा है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन के एप समीर के अनुसार चार साल पहले बनारस देश ही नहीं दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शुमार था। बनारस में एयर क्वालिटी का इंडेक्स 350 के ऊपर हुआ करता था। पिछले दो साल में बनारस की हवा में तेजी से बदलाव हुआ है।
2022 से शुरू हुई सुधार की कवायद का ही नतीजा है कि अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के आंकड़ों के अनुसार बनारस का एयर क्वालिटी इंडेक्स अधिकतम सौ और 50 के नीचे ही रिकॉर्ड किया गया। इसमें 306 दिन बनारस की हवा का वायु गुणवत्ता सूचकांक ग्रीन जोन में, 55 दिन येलो जोन में रहा। इसके अलावा तीन दिन बनारस की हवा ऑरेंज और दो दिन रेड जोन में रहीं।
एयर क्वालिटी इंडेक्स
| अप्रैल 2023 |
26 दिन ग्रीन जोन |
4 दिन येलो जोन |
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| मई 2023 |
24 दिन ग्रीन जोन |
6 दिन येलो जोन |
1 दिन ऑरेंज जोन |
| जून 2023 |
26 दिन ग्रीन जोन |
4 दिन येलो जोन |
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| जुलाई 2023 |
30 दिन ग्रीन जोन |
1 दिन येलो जोन |
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| अगस्त 2023 |
26 दिन ग्रीन |
3 दिन येलो जोन |
2 दिन रेड जोन |
| सितंबर 2023 |
28 दिन ग्रीन जोन |
2 दिन येलो जोन |
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| अक्तूबर 2023 |
30 दिन ग्रीन जोन |
1 दिन येलो जोन |
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| नवंबर 2023 |
19 दिन ग्रीन जोन |
10 दिन येलो |
1 दिन आरेंज जोन |
| दिसंबर 2023 |
22 दिन ग्रीन जोन |
8 दिन येलो जोन |
1 दिन ऑरेंज |
| जनवरी 2024 |
25 दिन ग्रीन जोन |
6 दिन येलो जोन |
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| फरवरी 2024 |
24 दिन ग्रीन जोन |
5 दिन येलो जोन |
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| मार्च 2024 |
26 दिन ग्रीन जोन |
5 दिन येलो जोन |
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नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त पहल का है असर
नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त पहल का असर है कि बनारस की हवा में तेजी से सुधार हुआ है। हवा में धूल कणों की संख्या लगातार कम हुई है और हवा में पीएम 10 की मात्रा में 10-15 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पीके शर्मा ने बताया कि शहर की हवा में तेजी से सुधार हुआ है। इसके तहत मिस्ट गन व स्प्रिंक्लर से नियमित रूप से पानी का छिड़काव कराया जा रहा है।
ऐसे हुआ बदलाव
- शहर में इलेक्ट्रानिक और सीएनजी वाहनों की संख्या बढ़ने से धूल, धुएं की मात्रा कम हुई है
- नई बनी सड़कें व फ्लाईओवर के चालू होने से हवा की स्थिति में काफी सुधार हुआ है
- सड़कों का निर्माण, पटरी व नाली के बीच के गैप को इंटरलाकिंग से भरा गया
- शहर में निर्माण के दौरान धूल कणों की मात्रा कम करने का ख्याल रखा गया
- निर्माण स्थल पर हरा पर्दा लगाकर कार्य करने के निर्देश का हो रहा है पालन