कुपोषित बच्चों के देखभाल का न्यूट्रीशियन रिहैबिलिटेशन सेंटर (एनआरसी) और कम वजन के साथ समय से पहले जन्म लेने वाले नवजातों के इलाज का द मदर एंड न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) मॉडल उत्तर प्रदेश में लागू किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने ब्लॉक स्तर पर बने 12 मिनी एनआरसी व 13 एमएनसीयू का लोकार्पण भी किया। इसमें कुपोषित बच्चों का इलाज किया जाएगा। उन्हें भर्ती करके आहार पोषण दिया जाएगा। खेलकूद की सुविधा भी मिलेगी। इससे मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। उपमुख्यमंत्री ने शुक्रवार को सर्किट हाउस में काशी सहित पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की है। उन्होंने कहा कि बनारस में उप केंद्रों पर रोजाना 25 मरीज देखे जा रहे हैं। यह मॉडल अनुकरणीय है। इसे प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा। प्रदेश में संसाधनों की कमी नहीं है। पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। डॉक्टर व अन्य स्टाफ की तैनाती की गई है। जनता को घर के पास ही अच्छा इलाज मिले, यह सुनिश्चित करना है। ऐसा तभी होगा, जब हर डॉक्टर अस्पतालों, स्वास्थ्य व उप केंद्रों को अपना मानकर सेवा करेंगे। नियमित ओपीडी होगी। हर बेड पर मरीज भर्ती किए जाएंगे। किसी मरीज को निजी अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा, संचारी रोग अभियान, मिशन इंद्रधनुष अभियान की समीक्षा की। इस मौके पर आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, अपर निदेशक स्वास्थ्य वाराणसी मंडल डॉ मंजुला सिंह सहित अस्पतालों के एसआईसी, सीएमएस मौजूद रहे।
मरीजों को भटकना न पड़े
उपमुख्यमंत्री ने गाजीपुर, चंदौली और जौनपुर के सीएमओ के साथ बैठक करके स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। कहा कि सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों के साथ ही उपकेंद्रों पर भी विशेष जोर देने की जरूरत है। अगर लोगों को उनके घर के पास उपकेंद्र पर ही सुविधाएं मिलेंगी तो उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा। इलाज पर ज्यादा खर्च करने की नौबत नहीं आएगी।
शिशु मृत्यु दर में आएगी
वाराणसी के जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने बनारस का मॉडल का विस्तृत ब्योरा रखा। उन्होंने कहा कि एमएनसीयू वार्ड में समय से पहले जन्मे (प्री मैच्योर) और कम वजन वाले बच्चों का उपचार किया जाएगा। इसके लिए सीएचसी चोलापुर, नरपतपुर, आराजीलाइन, हाथीबाजार, शहरी सीएचसी दुर्गाकुंड, चौकाघाट, काशी विद्यापीठ समेत ब्लॉक स्तर पर बनी 12 मिनी एनआरसी पर कुपोषित बच्चों को प्राथमिक व आवश्यक उपचार दिया जाएगा। इस पहल से शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। जिलाधिकारी ने आईएमएस बीएचयू कार्डियालॉजी विभाग के सहयोग से ईसीजी कराने और मरीजों को इमरजेंसी से रेफर कराने की ऑडिट कराने की पहल की जानकारी भी दी, जिसे उपमुख्यमंत्री ने सराहा है। सीएमओ संदीप चौधरी की भी सराहना की है।
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अपर निदेशक और सीएमओ को नसीहत
उपमुख्यमंत्री ने अपर निदेशक और सभी जिलों के सीएमओ को स्वास्थ्य सुविधाओं की निगरानी करते रहने की नसीहत दी। साथ ही कहा कि अपर निदेशक सप्ताह में तीन से चार जिलों का दौरा करें। इसकी रिपोर्ट बनाएं और निगरानी पोर्टल पर अपडेट करें। संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य भी दिया है। सीएमओ भी अस्पतालों का नियमित निरीक्षण करें और समस्याओं का त्वरित समाधान कराने पर जोर दें। उपकेंद्रों पर बिजली कनेक्शन हो, यह सुनिश्चित कराएं। इससे कंप्यूटर व उपकरणों को चलाने के साथ रखरखाव में दिक्कत नहीं आएगी।
उपमुख्यमंत्री ने दिए ये मंत्र
-हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर तैनात सीएचओ 30 लोगों की स्क्रीनिंग करें।
-डॉक्टरों के खाली पदों को वॉक इन इंटरव्यू के माध्यम से भरे जाएं।
-प्रदेश स्तर पर 100 विशेषज्ञों की तैनाती। जल्द ही अस्पतालों में तैनात किए जाएंगे।
-उपकरण खराब न हो, इसकी नियमित निगरानी कराएं।
-लोकल परचेज के खर्च की सीमा 20 से बढ़ाकर 40 फीसदी की गई, इसका लाभ मरीजों को मिलना चाहिए।
-रोगी कल्याण निधि में मौजूद बजट का इस्तेमाल मरीजों की सुविधाओं पर करें।
-अस्पताल की इमरजेंसी में आते ही तुरंत उपचार मिले, इसे अनिवार्य बनाएं।
सर्किट हाउस में वाराणसी मंडल के स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने जिलाधिकारी एस राजलिंगम द्वारा बच्चों की सेहत सुधार के लिहाज से दो महत्वपूर्ण सुविधाओं के शुरू कराने की पहल की सराहना कर बधाई दी। साथ ही इसे सही तरीके से लागू कराने के लिए सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी के प्रयास को सराहा।