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बनारस क्लब का घमासान खत्म, आईएमए में शुरू

Fri, 23 Sep 2016 02:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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बनारस क्लब और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन..। शहर के ‘रसूखदार’ लोगों के क्लबों-संगठनों में सबसे खास माने जाने वाले इन दोनों में कई स्तरों पर समानताएं हैं। बनारस क्लब के चुनाव की तस्वीर साफ हो चुकी है। इसके सात सदस्यों का निर्विरोध निर्वाचन हो गया। 25 सितंबर को सचिव का भी चुनाव हो जाएगा। इसी तारीख यानी 25 सितंबर को ही आईएमए का भी चुनाव होना है। एक और बात जो दोनों में समान है वो ये कि तकरीबन डेढ़ सौ से ज्यादा सदस्य ऐसे हैं जो आईएमए और बनारस क्लब दोनों में अपनी दखल रखते हैं। सबसे अहम ये कि इन दिनों दोनों ही संस्थाओं के केंद्र में है एक ही नाम - डॉ. एनपी सिंह। तीन दिन पहले तक बनारस क्लब में डॉ. एनपी सिंह को लेकर ही घमासान मचा हुआ था। हालांकि शह-मात के इस खेल में विरोधी खेमा भारी पड़ा और डॉ. सिंह को क्लब से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इधर, आईएमए में भी डॉ. एनपी सिंह गुट का दबदबा रहा है। वे एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे और यहां भी उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे। बनारस क्लब के  चुनाव की स्थिति तो स्पष्ट हो गई है लेकिन अब देखना यह है कि आईएमए के प्रतिष्ठापरक चुनाव में क्या  गुल खिलते हैं और किसका खेमा बीस पड़ता है...।
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बनारस क्लब के सात सदस्यों को चुनने के लिए जैसी पटकथा लिखी जा रही थी वैसी ही चुनावी ‘लीला’ गुरुवार को समाप्त हुई। नाम वापसी वाले दिन 12 में से 5 सदस्यों ने अपने नाम वापस ले लिए। इस तरह कार्यकारिणी के सात सदस्य निर्विरोध चुन लिए गए। हालांकि आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा नहीं की गई है। ये सदस्य 25 सितंबर को सचिव का चुनाव करेंगे। इन सात में से पांच सदस्य वही हैं जो पिछली बार भी चुनाव में जीते थे। इस तरह पुराने लोगों का दबदबा कायम रहा है।


बीते साल क्लब के चुनाव में 14 सदस्य चुनाव लड़े थे। इनमें से जयदीप सिंह, उदय राजगड़िया, राकेश वशिष्ठ, दीपक माहेश्वरी, नवीन कपूर वोटिंग के जरिए सदस्य का चुनाव जीते थे। इस बार ये सभी निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। क्लब प्रशासन के खिलाफ लड़ने वाले गुट ने घुटने टेक दिए हैं। पहले विधिवत चुनाव कराने पर चर्चा हुई। चुनाव प्रक्रिया में जुड़े लोगों ने अचानक यूटर्न ले लिया। नतीजा पांच लोगों से नामांकन पत्र वापस करा दिए गए। इसे वाट्सएप के जरिए प्रचारित भी किया गया। साथ ही दूसरे गुट के लोगों को साम, दाम, दंड, भेद की कहानी सुनाकर पर्चा वापस करने के लिए मजबूर किया गया। इस बारे में निर्वाचन अधिकारी/ एडीएम सिटी विंध्यवासिनी राय ने बताया कि पांच लोगों ने नाम वापस लिया है। बाकी बचे सात लोगों के निर्विरोध निर्वाचन की घोषणा के संबंध में क्लब से बाइलाज मांगा गया है। 25 को सचिव के चुनाव के साथ ही इनके नाम घोषणा की जाएगी।
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शहर के सबसे पुराने चिकित्सकों के संगठन आईएमए के चुनाव में भी लॉबिंग बिल्कुल उसी तरह होती दिख रही है, जैसे बनारस क्लब के चुनाव में चल रही है। वहां नाम वापसी में लॉबिंग करने वालों को सफलता मिल गई लेकिन यहां नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब अध्यक्ष, सचिव पद पर पूरा जोर लगाया जा रहा है। इस चुनाव में भी बनारस क्लब से हाल ही में निलंबित हुए आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एनपी सिंह और उनके साथ के चिकित्सक जो बनारस क्लब के सदस्य हैं, माहौल बनाने में जुटे हैं। यहां अध्यक्ष और सचिव पद पर दो-दो प्रत्याशी ही मैदान में हैं। इस आमने-सामने की टक्कर में हर दांव आजमाया जा रहा है। हालांकि यहां के 150 से अधिक सदस्य बनारस क्लब के सदस्य है, ऐसे में बनारस क्लब जैसा ‘मैनेज गेम’ यहां के चुनाव में भी देखने को मिल सकता है। पिछले साल चुनाव में गतिरोध्‍ा इस कदर उपजा कि अध्यक्ष पद पर फैसला टाई होने पर एक पक्ष ने कोर्ट की शरण ली आैर आईएमए के इतिहास में पहली बार दोनों पक्षों को छह-छह महीना का कार्यकाल देने का फैसला हुआ।
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