यूपी के बलिया जिले के बैरिया सीट से भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह और उनके समर्थकों की डीआईओएस से हुई हाथापाई का मामला दूसरे दिन रविवार को भी गर्म रहा। बलिया के जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने कहा कि वह इससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से को अवगत कराएंगे। वहीं डीआईओएस ने कहा कि गलत कार्य के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसकी सीएम से शिकायत करेंगे।
उधर, विधायक ने कहा अधिकारी बेलगाम और भ्रष्ट हैं। जो भी भ्रष्ट होगा उसका प्रतिकार किया जाएगा और प्रतिकार का स्वरूप कोई भी हो सकता है। रविवार को जिला विद्यालय निरीक्षक नरेंद्र देव ने साफ कहा कि भाजपा के जिलाध्यक्ष से संबंधित दो लोगों की नियुक्तियों के मामले को लेकर तूल दिया जा रहा है। वह गलत नहीं करेंगे चाहे कितना भी दबाव क्यों न पड़े।
यह भी कहा कि इस मामले में वह विधिक कार्रवाई करेंगे। सबसे पहले वह जिलाधिकारी को अवगत कराते हुए विभाग के उच्चाधिकारियों के माध्यम से मामले को मुख्यमंत्री तक पहुंचाएंगे। उधर, भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने कहा कि बैठक में डीआईओएस ने कहा था कि वह किसी विधायक-सांसद से नहीं डरते हैं। इसके चलते ही मामला बिगड़ा था। इस प्रकरण में जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत ने कहा कि जो भी घटनाक्रम है उसे सिलसिलेवार मुख्यमंत्री को भेजेंगे।
विधायक का अफसरों से पहले भी हो चुका है विवाद
भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह
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बैरिया विधायक का डीआईओएस से भिड़ना अफसरों के साथ उनके दुर्व्यवहार की पहली घटना नहीं है। बैरिया में वन दरोगा व पूर्ति विभाग के अधिकारियों के साथ भी उनका विवाद हो चुका है। यहां तक कि पूर्व डीएम और एसपी से भी उनकी रार ठन गई थी। पांच अक्टूबर 2017 की रात में बैरिया क्षेत्र के चिरैया मोड़ पर वन विभाग के दारोगा संतोष कुमार पर अवैध वसूली का आरोप लगाकर विधायक सुरेंद्र सिंह एवं उनके समर्थकों ने पीट दिया था।
27 सितंबर 2017 को बैरिया तहसील के तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक दिलीप सिंह के साथ मारपीट व 16 जनवरी 2018 को बैरिया तहसील के तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक सूर्यनाथ से भी दुर्व्यवहार किया है। विधायक ने पूर्ति विभाग के निरीक्षकों पर कोटेदारों को परेशान करने का आरोप लगाया था। 17 जून 2017 को दोकटी थाना के प्रभारी उपनिरीक्षक वीरेंद्र यादव से बालू को लेकर विवाद हो गया और उपनिरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई के लिए विधायक दोकटी थाना पर धरने पर बैठ गए। 29 मई 2018 को विधायक का एक कानूनगो उमेश श्रीवास्तव पर अवैध तरीके से पैसे मांगने का आरोप लगाने पर विवाद हो गया था।
31 जनवरी 2018 को तत्कालीन पूर्ति निरीक्षक गुफरान के साथ हुई मारपीट में विधायक का सह बताया गया। तत्कालीन डीएम सुरेंद्र विक्रम सिंह के साथ भी विधायक सुरेंद्र सिंह की भिड़ंत हो चुकी है। दोनों के बीच बालू खनन को लेकर हुए विवाद का मामला काफी गरमाया था। 18 जून 2017 को तत्कालीन एसपी सुजाता सिंह को कहा कि एसपी बलिया छोड़ो। एसपी पर भी विधायक ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। 31 मई 2018 को डीएम से मिलकर कहा कि तहसील के सभी अधिकारी भ्रष्ट हो गए हैं। दो दिन बाद कहा कि डीएम संवेदनशील नहीं है और कुछ दिनों बाद डीएम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विधायक ने मोर्चा खोल दिया।
जिलाधिकारी आवास पर डीएम की मौजूदगी में वार्ता करते विधायक व डीआईओएस
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विधायक व डीआईओएस के बीच हुए विवाद के पीछे डीआईओएस की ओर से भाजपा के रसूखदार नेता के भतीजे पर मुकदमा दर्ज करने के लिए करीब एक माह पहले पुलिस अधीक्षक को तहरीर देना है। इसके बाद से भाजपा नेता की ओर से डीआईओएस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया। हालांकि अभी तक पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया है।
बताया जाता है कि एक विद्यालय में भाजपा के रसूखदार नेता के भतीजे गौतम कुमार दुबे की बतौर परिचारक नियुक्ति को लेकर मामला विवादित है। जिले में कार्यभार संभालने के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक ने इसमें गड़बड़ी पाई तो उन्होंने गौतम कुमार दुबे समेत दो लोगों पर मुकदमा दर्ज करने के लिए पुलिस अधीक्षक को तहरीर भेज दी।
तहरीर में जिला विद्यालय निरीक्षक ने पूरे ब्योरे को अंकित किया है। सूत्रों की मानें तो इसके बाद सत्तापक्ष के नेताओं की त्योरियां चढ़ गईं और जिविनि को घेरने की फिराक में जुट गए। कुछ दिनों पहले जिविनि पर विभिन्न आरोप लगाते हुए भाजपा के जिलाध्यक्ष विनोद शंकर दुबे ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर उन्हें जिले से हटाने की गुहार लगाई जांच कर कार्रवाई की मांग की।
इसके बाद भाजपा जिलाध्यक्ष ने जिले में दौरे पर आए श्रीकांत शर्मा को भी जिविनि के खिलाफ कार्रवाई के लिए शिकायती पत्र दिया। इसके बाद से भाजपा नेताओं व जिविनि के बीच खाई बढ़ती गई।