कांग्रेस से गठबंधन के बाद सपा में आए दिन आ रहे बयान और टिकटों में बदलाव के बीच बसपा मुखिया मायावती ने नए तरीके की सोशल इंजीनियरिंग पर काम तेज कर दिया है।
2007 में सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर बहुमत हासिल करने वाली मायावती ने इसी के तहत सपा के पूर्व मंत्रियों अंबिका चौधरी और नारद राय के अलावा कौमी एकता दल के अंसारी बंधुओं के जरिए पूर्वांचल में सभी वर्गों के साधने की कोशिश की है।
बसपा ने भूमिहार, यादव और मुसलमानों के दिग्गज नेताओं को टिकट देकर पूर्वांचल के चुनावी समीकरण बदल दिए हैं।
पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के बसपा छोड़ने के बाद पार्टी में पिछड़ा वर्ग के किसी बड़े चेहरे की कमी महसूस हो रही थी, जो अंबिका के आने से कुछ हद तक दूर हो गई है।
वाराणसी, आजमगढ़ और मिर्जापुर मंडल में 61 सीटें हैं। चर्चाएं हैं कि पिछड़ा, दलित और मुसलमानों के एक साथ आने पर पूर्वांचल के नतीजे अप्रत्याशित हो सकते हैं।
मायावती की मुसलमानों को लुभाने की सियासी रणनीति ही है कि वह चुनावी रैलियों की शुरुआत 28 फरवरी को मऊ से करेंगी।