राजातालाब (वाराणसी)। बभनियाव गांव में उत्खनन के दौरान बृहस्पतिवार को बड़ी मछली का कांटा मिलने से टीले के पास से गगा बहने के प्रमाण है। मिट्टी की गोटियां से कयास लगा जाता है कि पहले लोग मनोरंजन के लिए गोटी खेलते थे। यहां एक फिर मिट्टी के मनके मिले।
खुदाई की देखरेख कर रहे बीएचयू के प्रोफेसर एके सिंह ने बताया कि यह 2200 वर्ष पुराना प्रतीत हो रहा है। मछली का बड़ा कांटा मिलने से प्रतीत होता है कि पहले मछली का आकार बड़ा रहा होगा। उन्होंनेे बताया कि गंगा में इस तरह की बड़े आकार की मछलियां पाई जाती हैं। यहां मछली का कांटा मिलना बभनियाव के टीले के पास से गंगा के बहने के प्रमाण हैं। मिट्टी की बनीं गोटियां बताती हैं कि लोग खाली समय में मनोरंजन के तौर पर इसे खेलते रहेंगे। खुदाई में नीचे की ओर जाने पर मौर्यकालीन कृष्ण लिपिक और लाल लेपित बर्तनों के टुकड़े भी मिले जिससे यह सिद्ध होता है कि यहां की सभ्यता 2400 वर्ष पुरानी है। नीचे और पुराने प्रमाण मिलने की संभावना है। बृहस्पतिवार को नए गड्ढे की खुदाई के साथ-साथ पुराने गड्ढों की साफ सफाई भी की गई। एक मुखी शिवलिंग वाले गड्ढे में कीचड़ भर गया था जिसे साफ करके निकाला गया।
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बभनियाव के लोगों ने मुख्यमंत्री को भेजा न्योता
राजातालाब। बभनियाव गांव के लोगों मुख्यमंत्री को गांव में खुदाई स्थल देखने के लिए न्योता भेजा है। ग्राम प्रधान रत्नेश कुमार सिंह का कहना है कि गांव में हजारों वर्ष पुरानी पुरातत्व और ऐतिहासिक चीजें मिल रही हैं। एक मुखी शिवलिंग भी मिल चुका है जिससे गांव और वाराणसी और प्रदेश की प्राचीनता सिद्ध हो चुकी है। ऐसे में मुख्यमंत्री को भी उत्खनन कार्य को देखना चाहिए और पुरातात्विक अवशेष को गांव में ही संरक्षित किए जाने के लिए सरकार द्वारा योजना बनाई जानी चाहिए। पूर्व प्रधान मायाशंकर सिंह, लालबहादुर सिंह, जय नारायण सिंह, सर्वेश सिंह ,स्वयंबर सिंह, संदेश सिंह, आदेश सिंह, रमेश सिंह, विवेक सिंह अरुण प्रकाश सिंह, दिनेश सिंह, पिंकू सिंह, राकेश सिंह का भी कहना है कि मुख्यमंत्री को यहां आना चाहिए।