भगवान विश्वेश्वर की नगरी काशी सोमवार को अपने आराध्य के तिलक समारोह के दौरान जश्न में डूबी रही। परंपरा के अनुसार वधू पक्ष की ओर से आए तिलकहरूओं ने वस्त्र, आभूषण, मिष्ठान और फल-फूल बाबा के चरणों में समर्पित किया और महाशिवरात्रि को प्रस्तावित विवाह समारोह के लिए लग्न पत्रिका का आदान-प्रदान किया।
सैकड़ों श्रद्धालु और काशीवासी इस पुण्य उत्सव के साक्षी बने। इस अवसर संपूर्ण मंदिर प्रांगण और पूरी विश्वनाथ गली हर-हर महादेव के उद्घोष और रेड जोन मांगलिक गीतों से गूंजता रहा।
परंपरानुसार विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के आवास पर बाबा विश्वनाथ की पंचमुखी रजत प्रतिमा का तिलकोत्सव किया गया। शाम को आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों ने बाबा का गुणगान श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। लोक मान्यताओं के अनुसार शिव विवाह के पूर्व वसंत पंचमी के दिन दक्ष प्रजापति ने भगवान शंकर का तिलक किया था।
ठंडई, पंचमेवा, फल व मिष्ठान्न का लगाया भोग
बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव
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दोपहर 12 बजे बाबा की रजत प्रतिमा का पंचगव्य से स्नान कराया गया। तदुपरांत पांच वैदिक ब्राह्मण अंकित भारती, जितेंद्र शास्त्री, पवन शास्त्री, उदय शंकर त्रिपाठी और महेश शास्त्री ने विशेष पूजन किया।
पूजनोपरांत बाबा की प्रतिमा का विशेष शृंगार कर सायंकाल डॉ. तिवारी ने विधि-विधान से तिलकोत्सव किया गया। बाबा की रजत प्रतिमा का ठंडई, पंचमेवा, फल व मिष्ठान्न का भोग लगाया गया। बाबा की रजत प्रतिमा की विशेष पूजा महाशिवरात्रि तक चलती रहेगी।
मान्यताओं के अनुसार वसंत पंचमी को बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव होता है तो महाशिवरात्रि को विवाह और रंगभरी एकादशी को मां पार्वती का गौना कराकर ले जाते हैं। महाशिवरात्रि पर धूमधाम से निकलने वाली बारात कौमी एकता की मिसाल है।
इसमें पार्वती हिंदू तो शिव मुस्लिम संप्रदाय से बनते हैं। बारात महामृत्युंजय महादेव से निकलती है और दशाश्वमेध घाट से पहले विश्वनाथ गली के समीप स्थित गुरु बृहस्पति मंदिर के समीप विवाह मंडप सजता है। वहीं शादी होती है।