कभी आतंकवाद की नर्सरी तो कभी अंडरवर्ल्ड डान अबु सलेम की वजह से आजमगढ़ जिले का नाम भले ही सुर्खियों में रहा हो, लेकिन बीती 26 जनवरी की रात सिधारी थाने के हलुवाडीह पंप के पास हुई मुठभेड़ में 50 हजार के इनामी मुकेश राजभर को ढेर करने के बाद जिले का नाम प्रदेश में नंबर एक पर हो गया है।
मुकेश के रुप में पांचवां एनकाउंटर होने के बाद जिले की पुलिस ने शामली जिले को पीछे छोड़ दिया है। अपराध नियंत्रण के लिए सरकार की तरफ से खुली छूट मिलते ही पुलिस बदमाशों को उनकी मांद में घुसकर तलाश करने लगी।
पुलिस के भय के चलते अपराधी या तो जिले से बाहर चले गए या फिर दर्ज किसी पुराने मुकदमे में आत्मसमर्पण कर जेल चले गए। एसपी अजय कुमार साहनी के नेतृत्व में अपराधियों के विरुद्ध छेड़ी गई जंग का पहला आगाज तीन अगस्त 2017 को मेंहनगर थाना क्षेत्र के शेरपुर कुटी के पास 15 हजार रुपये के इनामी जयहिंद यादव को मुठभेड़ में ढेर करने से किया गया।
इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में मुठभेड़ और एनकाउंटर का दौर शुरू हो गया। इस कार्रवाई में आजमगढ़ की पुलिस को टक्कर देते हुए शामली जिले की पुलिस भी फार्म में आ गई।
जिले की पुलिस जयहिंद के एनकाउंटर के कुछ ही दिन के भीतर रामपुर जिले की पुलिस की अभिरक्षा से फरार हुए सुजीत सिंह बुढ़वा, श्यामबाबू पासी गिरोह का रामजी पासी, छन्नू सोनकर, को मुठभेड़ में ढेर कर एनकाउंटर के मामले में शामली जिले की बराबरी कर लिया।