फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चोरी के वाहनों पर फर्जी नंबर लगाकर बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़, पांच गिरफ्तार

Sun, 17 Jun 2018 10:16 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,वाराणसी
विज्ञापन
बरामद वाहनों में दस कार और दो जेसीबी शामिल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
यूपी के आजमगढ़ जिले में स्वाट टीम वाहन चोर गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से चोरी के 12 वाहन बरामद हुए हैं। फरार दो बदमाशों की तलाश की जा रही है। बरामद वाहनों में दस लग्जरी कारें और दो जेसीबी शामिल हैं।  
विज्ञापन


तरवां थाना क्षेत्र के बनगांव के प्रधान सतीश सिंह ने 16 जून को मेहनाजपुर थाने में फर्जी नंबर प्लेट लगाकर चलने वाले अभिषेक सिंह के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रभारी निरीक्षक मेहनाजपुर अखिलेश कुमार और स्वाट टीम प्रभारी राजेश उपाध्याय ने अभिषेक के घर दबिश दी।

छापे में उसका सहयोगी नीतीश सिंह भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। उसके कब्जे से चोरी की एक ब्रेजा कार बरामद हुई। पूछताछ में उसने बताया कि वह चोरी के वाहनों का फर्जी तरीके से रजिस्ट्रेशन कराकर बेचने का काम करता है। गिरोह का मुखिया सकिया बकिया गांव निवासी राकेश और मनोज सिंह हैं।
विज्ञापन


नीतीश की निशानदेही पर हुई छापेमारी में चोरी की 10 लग्जरी कारें और दो जेसीबी बरामद हुईं। गिरफ्तार चोरों में मेहनाजपुर थाना क्षेत्र के बहलोलपुर गांव निवासी अभिषेक सिंह, नीतीश कुमार सिंह के अलावा पीयूष सिंह उर्फ विनीत, इसी थाने के सकिया बकिया गांव निवासी अशोक सिंह और लखनऊ के साहखेड़ा गोसाईगंज के नई बस्ती निवासी राजकुमार यादव का नाम शामिल है।

आरोपियों के मुताबिक आदिल नामक व्यक्ति दिल्ली और नोएडा से गाड़ियां इन्हें भेजता है। जिन्हें ये स्थानीय ग्राहकों को बेचते हैं। एसपी रविशंकर छवि ने बताया कि जांच में पता चला है कि राकेश सिंह और मनोज सिंह बैंक से भी गाड़ियां फाइनेंस कराते हैं।

बाद में उन्हें गायब कर चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराते और इंश्योरेंस का पैसा हड़प लेते हैं। इस प्रकार इस गिरोह ने बहुत सी गाड़ियां अब तक क्षेत्र में बेची हैं। जैसे-जैसे लोगों के नाम की जानकारी हो रही है। वैसे-वैसे गाड़ियों को जब्त किया जा रहा है।  
विज्ञापन

बैंक और आरटीओ की हो सकती है मिलीभगत

एसपी सिटी सुभाष चंद्र गंगवार - फोटो : अमर उजाला
 एसपी सिटी सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि पूछताछ में पता चला कि कई वाहन फर्जी रजिस्ट्रेशन नंबर लगाकर बेचे गए हैं। ऐसे में यदि वाहनों का पेपर तैयार हुआ होगा तो उसमें आरटीओ कार्यालय के किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत हो सकती है।

इसके अलावा ये लोग बैंक से फाइनेंस वाहनों की चोरी दिखाकर दूसरी गाड़ी ले लेते हैं। ऐसा बैंक या फाइनेंस कंपनी के किसी कर्मचारी की मिलीभगत से ही संभव है। ऐसे में पुलिस ने इस मामले को भी अपनी जांच में शामिल किया है।   


एसपी  ने बताया कि गिरोह का मुखिया राकेश सिंह और मनोज सिंह चोरी के वाहन बेचने के साथ जमीन खरीदने और बेचने का भी काम करते हैं। दोनों प्रदेश के कई जिलों में लोगों को फर्जी तरीके से दूसरे की जमीन खरीद और बेच चुके हैं। उसके विरुद्ध लखनऊ सहित अन्य कई जिलों में फर्जीवाड़ा के मुकदमे दर्ज हैं। जिसकी जांच की जा रही है।  

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें